17 सितम्बर 2026 |
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7 लाख पेड़ों पर लटकी तलवार: हसदेव को बचाने विधायक देवेंद्र यादव ने केंद्र को लिखा पत्र, कल होने वाली बैठक में होगा बड़ा फैसला

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OM Darpan

May 08, 2026 05:00 am 214 views
7 लाख पेड़ों पर लटकी तलवार: हसदेव को बचाने विधायक देवेंद्र यादव ने केंद्र को लिखा पत्र, कल होने वाली बैठक में होगा बड़ा फैसला

MLA Devendra Yadav- omdarpam news

भिलाई (ओमदर्पण न्यूज़)।

छत्तीसगढ़ के हसदेव अरण्य क्षेत्र में प्रस्तावित केंटे एक्सटेंशन कोल ब्लॉक को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज हो गई है। भिलाई विधायक देवेंद्र यादव ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की सलाहकार समिति को पत्र लिखकर 1742.60 हेक्टेयर वन भूमि के डायवर्सन (व्यपवर्तन) प्रस्ताव को निरस्त करने की मांग की है। यह महत्वपूर्ण मामला कल, 8 मई 2026 को नई दिल्ली में होने वाली सलाहकार समिति की बैठक में रखा जाना है।

विधायक देवेंद्र यादव ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि हसदेव अरण्य केवल कोयले का भंडार नहीं, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की अमूल्य पर्यावरणीय और सांस्कृतिक धरोहर है। यहां करीब 7 लाख पेड़ों की कटाई का खतरा मंडरा रहा है, जिससे पूरे क्षेत्र का पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ सकता है। उन्होंने अपील की है कि दलगत राजनीति से ऊपर उठकर हसदेव को बचाने की जरूरत है।

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98 प्रतिशत हिस्सा घने वन क्षेत्र में, वन्यजीवों पर संकट

पत्र में उल्लेख किया गया है कि प्रस्तावित कोल ब्लॉक का लगभग 98 प्रतिशत हिस्सा घने वन क्षेत्र के अंतर्गत आता है। यह क्षेत्र जैव विविधता के लिहाज से बेहद संवेदनशील है। यह हाथी, तेंदुआ और बाघ जैसे वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास है। हसदेव अरण्य में 400 से अधिक वनस्पति व जीव प्रजातियां और 100 से ज्यादा पक्षी प्रजातियां पाई जाती हैं। खनन से इनका अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।

बढ़ेगा मानव-हाथी संघर्ष, नदियों पर पड़ेगा असर

देवेंद्र यादव ने समिति को बताया कि प्रस्तावित खनन क्षेत्र लेमरू हाथी रिजर्व के पास स्थित है। खनन शुरू होने पर हाथियों के आवागमन का रास्ता (कॉरिडोर) प्रभावित होगा, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ेंगी। इसके साथ ही, इस परियोजना का चारनोई नदी, हसदेव नदी और बांगो बांध के जलग्रहण क्षेत्र पर भी गंभीर और नकारात्मक असर पड़ेगा।

आदिवासियों की आजीविका और विधानसभा प्रस्ताव का दिया हवाला

विधायक ने अपने पत्र में छत्तीसगढ़ विधानसभा द्वारा 26 जुलाई 2022 को पारित उस सर्वसम्मत प्रस्ताव का भी विशेष तौर पर जिक्र किया, जिसमें हसदेव अरण्य क्षेत्र में आगे खनन नहीं किए जाने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि स्थानीय आदिवासी समुदायों के वन अधिकारों और उनकी आजीविका पर भी इस परियोजना का सीधा असर पड़ेगा, क्योंकि इस इलाके के हजारों परिवार पूरी तरह से वन उपज पर ही निर्भर हैं।

देवेंद्र यादव ने सलाहकार समिति से आग्रह किया है कि जनहित, पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए 8 मई की बैठक में इस प्रस्ताव को पूर्णतः अस्वीकार किया जाए।

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