मोर गांव मोर पानी महाभियान के तहत तालाब गहरीकरण कार्य शुरू
OM Darpan
Jun 03, 2026 12:24 am
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03 Jun 2026
दुर्ग (ओम दर्पण)।
प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा प्रारंभ किए गए मोर गांव मोर पानी महाभियान के अंतर्गत दुर्ग जिले में जल संरक्षण, भू-जल संवर्धन और ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा देने के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। इस महाभियान के तहत मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना) के माध्यम से जिले की कुल 102 ग्राम पंचायतों में 112 'नवा तरिया' एवं तालाब गहरीकरण कार्यों को स्वीकृति प्रदान की गई है।15 जून तक कार्य पूर्ण करने का लक्ष्य
कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह के निर्देशन में इन निर्माण कार्यों को आगामी 15 जून तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। ग्राम पंचायतों के सरपंच, उपसरपंच और पंचों के नेतृत्व में पंजीकृत श्रमिक पूरी सक्रियता से काम में जुटे हैं। ग्रामसभा की सहमति से चयनित इन तालाब गहरीकरण और नवा तरिया कार्यों से बारिश से पहले ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार के बेहतरीन अवसर मिल रहे हैं।इन ग्राम पंचायतों में हो रहा है कार्य
मनरेगा के तहत स्वीकृत 112 कार्यों में तीन जनपद पंचायतों की 102 ग्राम पंचायतें शामिल हैं:- जनपद पंचायत धमधा (40 ग्राम पंचायतें): अछोली, अगार, अरसी, बरहापुर, बसनी, बिरझापुर, बिरोदा, बोरी और देवरी सहित 40 पंचायतों में कार्य स्वीकृत।
- जनपद पंचायत दुर्ग (49 ग्राम पंचायतें): अण्डा, अंजोरा, बोरई, चांगोरी, धनोरा, पुरई और थनौद सहित 49 पंचायतों में नवा तरिया निर्माण जारी।
- जनपद पंचायत पाटन (13 ग्राम पंचायतें): करेला, असोगा, गब्दी, गाड़ाडीह, गुढ़ियारी, कानाकोट, करसा, केसरा, रवेली, रेंगाकठेरा, सिकोला, तर्रा एवं तेलीगुण्डरा में तालाब गहरीकरण कार्य स्वीकृत।
10 हजार घनमीटर जल भंडारण और मत्स्य पालन को मिलेगा बढ़ावा
जिला पंचायत दुर्ग के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री बजरंग कुमार दुबे ने बताया कि मोर गांव मोर पानी महाभियान जिले में ग्रामीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।- इन तालाबों के निर्माण पूर्ण होने के बाद प्रत्येक संरचना में 10 हजार घनमीटर से अधिक जल भंडारण क्षमता विकसित होगी, जिससे भू-जल स्तर में सुधार आएगा।
- निर्माण कार्य पूर्ण होने के पश्चात तालाबों का संचालन स्थानीय महिला स्व-सहायता समूहों को सौंपा जाएगा।
- इससे महिलाओं को आजीविका के नए अवसर प्राप्त होंगे और उनकी आर्थिक भागीदारी बढ़ेगी।
- प्रत्येक तालाब में प्रतिवर्ष लगभग 13 से 15 क्विंटल मत्स्य उत्पादन की संभावना है, जिससे ग्रामीण परिवारों की आय में अतिरिक्त वृद्धि होगी।
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