पारंपरिक व्यंजनों से आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रहीं मोहला की ग्रामीण महिलाएं
OM Darpan
मोहला। छत्तीसगढ़ के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद अब ग्रामीण इलाके की महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता और आर्थिक सशक्तीकरण का मजबूत माध्यम बन रहा है। मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के मोहला विकासखंड में 'बिहान' योजना से जुड़ी ज्योति महिला स्व-सहायता समूह की 12 महिलाएं बिहान गढ़ कलेवा का संचालन कर स्वरोजगार की एक नई मिसाल पेश कर रही हैं। सही अवसर और प्रोत्साहन मिलने से इन महिलाओं ने अपने हुनर को ही आजीविका का आधार बना लिया है।
सामूहिक प्रयास से बढ़ा आत्मविश्वास
मोहला स्थित बिहान गढ़ कलेवा में समूह की महिलाएं पारंपरिक छत्तीसगढ़ी व्यंजन तैयार कर लोगों को परोस रही हैं। एक ओर जहां आम लोगों को छत्तीसगढ़ की समृद्ध खानपान संस्कृति और पारंपरिक स्वाद से जुड़ने का मौका मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर इन महिलाओं को नियमित आजीविका मिल रही है। समूह की सभी 12 महिलाएं आपसी सहयोग से इस गढ़ कलेवा का संचालन कर रही हैं और अपनी कड़ी मेहनत से परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही हैं।
हुनर से मिली आत्मसम्मान की नई पहचान
बिहान गढ़ कलेवा से जुड़ने के बाद इन महिलाओं को अपनी पाक-कला को रोजगार में बदलने का बेहतरीन अवसर मिला है। सामूहिक रूप से काम करने से उनके भीतर आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता भी विकसित हो रही है। समूह की महिलाओं का कहना है कि यह उनके लिए केवल आजीविका का साधन मात्र नहीं है, बल्कि आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता की एक नई पहचान है। महिलाओं ने स्वरोजगार के इस अवसर के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार जताया है।
सांस्कृतिक विरासत को मिल रहा बढ़ावा
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के जरिए ग्रामीण महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़कर आजीविका के नए अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। ज्योति महिला स्व-सहायता समूह की यह सफल पहल दर्शाती है कि स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक हुनर के दम पर महिलाएं न केवल आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को भी आगे बढ़ा रही हैं।
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