बस्तर के गोहनामुण्डा में अमृत सरोवर से मिटा जल संकट
OM Darpan
वनकोमार पंचायत में 16 लाख की लागत से बना तालाब, मछलीपालन से पलायन पर लगी रोक
बस्तर। छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में जल संरक्षण और ग्रामीण स्वावलंबन की दिशा में एक अनुकरणीय मिसाल पेश की गई है। जनपद पंचायत बकावंड की ग्राम पंचायत वनकोमार अंतर्गत गोहनामुण्डा क्षेत्र में ‘मिशन अमृत सरोवर’ के तहत निर्मित नया तालाब ग्रामीणों के लिए वरदान साबित हो रहा है।
कभी यह क्षेत्र भीषण जल संकट की मार झेल रहा था, जहां वर्षा जल संचयन की व्यवस्था न होने से कुओं और हैंडपंपों का जलस्तर अत्यधिक गिर जाता था। इस स्थायी समस्या के समाधान और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संबल देने के लिए यहां अमृत सरोवर निर्माण की योजना तैयार की गई थी।
लागत में चार लाख रुपए की हुई बचत
ग्राम पंचायत वनकोमार द्वारा क्रियान्वित इस परियोजना ने समयबद्धता और लागत प्रबंधन का उदाहरण पेश किया है। वित्तीय वर्ष 2024-25 के तहत स्वीकृत 20 लाख रुपए की लागत वाली इस योजना को मात्र 16 लाख रुपए के वास्तविक व्यय से 13 मई 2025 को पूरा कर लिया गया।
निर्माण कार्य के दौरान स्थानीय ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करते हुए उन्हें गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराए गए। सरोवर के तटबंधों को सुदृढ़ बनाकर परिसर में छायादार एवं फलदार पौधे लगाए गए हैं, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ सौंदर्गीकरण भी हुआ है।
मछलीपालन से आर्थिक स्थिति होगी मजबूत
आज लबालब भरा यह सरोवर वर्षा जल संचयन और भूजल स्तर को रिचार्ज करने के साथ ही आर्थिक सशक्तिकरण का केंद्र बन चुका है। मत्स्यपालन विभाग के सहयोग से सरोवर में रोहू, कतला और मृगल जैसी उन्नत प्रजातियों का बीज डालकर वैज्ञानिक पद्धति से मछलीपालन शुरू किया गया है।
इससे ग्राम पंचायत एवं महिला स्व-सहायता समूह को निरंतर अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है। स्थानीय स्तर पर टिकाऊ रोजगार मिलने से ग्रामीणों के मौसमी पलायन पर प्रभावी विराम लगा है और सिंचाई सुविधा सुलभ होने से कृषि उत्पादन को नई मजबूती मिली है।
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