24 सितम्बर 2026 |
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दुर्ग में मनरेगा की धूम: 50 हजार मजदूरों को मिला काम, धमधा रोजगार देने में सबसे अव्वल

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OM Darpan

Jan 09, 2026 02:27 am 1,322 views
दुर्ग में मनरेगा की धूम: 50 हजार मजदूरों को मिला काम, धमधा रोजगार देने में सबसे अव्वल

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दुर्ग (रोहितास सिंह भुवाल)।

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) जिले में ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए 'संजीवनी' साबित हो रही है। खरीफ फसल की कटाई के बाद जिले में मनरेगा के कार्यों ने रफ्तार पकड़ ली है। वर्तमान में जिले की 300 में से 294 ग्राम पंचायतों में विभिन्न निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर जारी हैं, जिसके चलते लगभग 50,000 ग्रामीण मजदूरों को सीधा रोजगार मिल रहा है। प्रशासन द्वारा इन कार्यों के लिए कुल 1,642 मस्टर रोल जारी किए गए हैं।

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धमधा ब्लॉक रोजगार देने में सबसे आगे

आंकड़ों पर गौर करें तो धमधा जनपद पंचायत क्षेत्र मनरेगा के तहत रोजगार उपलब्ध कराने में पूरे जिले में शीर्ष पर है। धमधा क्षेत्र की 119 ग्राम पंचायतों में से 115 में कार्य संचालित हैं। यहाँ सर्वाधिक 25,298 मजदूरों को रोजगार मिला है, जिसके लिए 586 मस्टर रोल जारी किए गए हैं।

दूसरे स्थान पर जनपद पंचायत पाटन है, जहाँ 108 ग्राम पंचायतों में काम चल रहा है। यहाँ 14,997 मजदूरों को काम दिया गया है और 564 मस्टर रोल जारी हुए हैं। वहीं, जनपद पंचायत दुर्ग की 71 ग्राम पंचायतों में 8,831 मजदूरों को रोजगार मिला है, जिसके लिए 709 मस्टर रोल जारी किए गए हैं।

पिछले साल के मुकाबले तीन गुना बढ़ा काम

जिला पंचायत दुर्ग के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) बजरंग कुमार दुबे ने बताया कि मजदूरों की मांग के आधार पर गत वर्ष की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जन-जागरूकता अभियान चलाकर मजदूरों को निरंतर रोजगार से जोड़ा जा रहा है, ताकि पलायन रुके और गांव में ही आय का जरिया बने।

गांवों में हो रहे ये पक्के काम

मनरेगा के तहत केवल गड्ढे खोदने का काम नहीं, बल्कि स्थायी संपत्ति निर्माण पर जोर दिया जा रहा है। जिले में आजीविका डबरी निर्माण, तालाब गहरीकरण, नाली निर्माण, वृक्षारोपण और आंगनबाड़ी भवन निर्माण जैसे कार्य चल रहे हैं। इसके अलावा जल संरक्षण के लिए अमृत सरोवर, सोख पिट, रिचार्ज पिट एवं चेक डेम भी बनाए जा रहे हैं।

गौरतलब है कि खरीफ फसल का काम पूरा होने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में मिट्टी के कार्यों की मांग बढ़ जाती है। प्रशासन का लक्ष्य है कि ज्यादा से ज्यादा मजदूरों को इस समय काम उपलब्ध कराया जा सके।

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