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चीन और भारत के बीच उच्चस्तरीय बातचीत: शी और मोदी ने सीमा विवाद सुलझाने पर जताई सहमति

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OM Darpan

Nov 19, 2024 06:17 am 156 views
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  बीजिंग। चीन ने सोमवार को स्पष्ट किया कि वह रूस में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर हुई मुलाकात में राष्ट्रपति शी चिनफिंग और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच हुए महत्वपूर्ण समझौतों को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। ब्राजील में होने वाले जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान मोदी और शी के बीच मुलाकात की संभावनाओं के संबंध में पूछे गए सवाल पर चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा, "राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने कजान में हाल ही में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की थी।" उन्होंने कहा कि चीन दोनों देशों के नेताओं के बीच बनी सहमति को लागू करने, संवाद व सहयोग बढ़ाने और रणनीतिक आपसी विश्वास को बढ़ावा देने के लिए भारत के साथ मिलकर काम करने को तैयार है। लिन जियान ने कहा कि नेताओं और अधिकारियों के बीच बैठकों के कार्यक्रम की जानकारी उनके पास नहीं है। रूस के कजान में पिछले महीने हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान लगभग 50 मिनट की इस बैठक में नरेन्द्र मोदी और शी चिनफिंग ने पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर गतिरोध वाले स्थानों से सैनिकों की वापसी और गश्त शुरू करने पर सहमति व्यक्त की थी। दोनों नेताओं ने विभिन्न द्विपक्षीय वार्ता तंत्र को फिर से शुरू करने के निर्देश भी जारी किए थे। बैठक में नरेन्द्र मोदी ने कहा था कि मतभेदों और विवादों को उचित तरीके से सुलझाना चाहिए और सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति एवं स्थिरता बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि परस्पर विश्वास, एक-दूसरे का सम्मान और परस्पर संवेदनशीलता को संबंधों की नींव के रूप में बनाए रखना चाहिए। वहीं शी चिनफिंग ने कहा कि चीन-भारत संबंध मूलतः इस पर निर्भर करते हैं कि दोनों बड़े विकासशील देश, जिनकी आबादी करीब 1.4 अरब है, एक-दूसरे के साथ कैसे व्यवहार करते हैं। उन्होंने जोर दिया कि चीन और भारत को एक-दूसरे के प्रति अच्छी रणनीतिक धारणा बनाए रखनी चाहिए और दोनों देशों के बीच सद्भाव एवं साझी विकास के लिए "सही और उज्ज्वल मार्ग" तलाशने की दिशा में मिलकर काम करना चाहिए। जून 2020 में गलवान घाटी में हुई भीषण सैन्य झड़प के बाद भारत और चीन के बीच संबंध निचले स्तर पर पहुंच गए थे। यह झड़प पिछले कुछ दशकों में दोनों देशों के बीच सबसे भीषण थी। भारत और चीन ने पूर्वी लद्दाख के टकराव वाले स्थानों से सैनिकों की वापसी और गश्त फिर से शुरू करने को लेकर 21 अक्टूबर को एक महत्वपूर्ण समझौता किया था। इस समझौते को पूर्वी लद्दाख में पिछले लगभग चार वर्षों से जारी सैन्य गतिरोध के समाधान की दिशा में एक बड़ी सफलता के रूप में देखा गया था। नरेन्द्र मोदी और शी चिनफिंग ने भारत-चीन सीमा मुद्दे पर विशेष प्रतिनिधियों को वार्ता के लिए जल्द मिलने और एलएसी से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए अपने प्रयास जारी रखने के निर्देश भी दिए थे। इस वार्ता के लिए भारत के विशेष प्रतिनिधि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल हैं, जबकि चीनी पक्ष का नेतृत्व विदेश मंत्री वांग यी कर रहे हैं। विशेष प्रतिनिधि तंत्र की स्थापना 2003 में हुई थी और तब से दोनों देशों के बीच 20 दौर की वार्ता हो चुकी है, जिसमें आखिरी वार्ता 2019 में हुई थी।
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