दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ने किया "आपातकालीन मार्शल लॉ" लागू, घोषणा पर विपक्ष ने किया विरोध
OM Darpan
Dec 04, 2024 07:24 am
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04 Dec 2024
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति यून सुक योल ने मंगलवार (3 दिसंबर) को देश में "आपातकालीन मार्शल लॉ" लागू करने की घोषणा की। इस कदम के तहत उन्होंने "देश विरोधी" और "उत्तर कोरिया समर्थक ताकतों" को समाप्त करने का वादा किया। राष्ट्रपति की इस घोषणा के बाद, सेओल में संसद के बाहर भारी हंगामा देखा गया। प्रदर्शनकारी संसद में घुसने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक लिया।
दक्षिण कोरिया की सेना ने भी कहा कि अब राजनीतिक सभाओं और संसद की गतिविधियों को निलंबित किया जाएगा, जो "सामाजिक भ्रम" पैदा कर सकती हैं। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि मार्शल लॉ कब तक लागू रहेगा, लेकिन कानून के अनुसार इसे संसद में बहुमत के वोट से हटाया जा सकता है। वर्तमान में दक्षिण कोरिया की संसद में विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी का बहुमत है।राष्ट्रपति यून ने उत्तर कोरिया से किसी विशेष खतरे का हवाला नहीं दिया, बल्कि अपने घरेलू राजनीतिक विरोधियों पर निशाना साधा। यह 1980 के बाद से दक्षिण कोरिया में पहली बार है जब मार्शल लॉ लागू किया गया है। मार्शल लॉ की घोषणा के बाद, डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता किम किजोंग ने अपने सभी सदस्य को संसद में इकट्ठा होकर इसका विरोध करने का आह्वान किया। रॉयटर्स के अनुसार, विपक्ष के लगभग 70 सदस्य संसद में उपस्थित थे, जबकि बाकी बाहर इकट्ठा हो रहे थे। पार्टी के बीच तनाव बढ़ा था, खासकर आगामी बजट बिल को लेकर। यून पर विपक्षी दलों ने उनकी पत्नी और अधिकारियों से जुड़े घोटालों की स्वतंत्र जांच की मांग को नकारने के लिए भी आलोचना की है। संसद में प्रस्ताव पारित: बुधवार (4 दिसंबर) को दक्षिण कोरिया की संसद ने एक प्रस्ताव पास किया, जिसमें राष्ट्रपति यून सुक योल द्वारा घोषित मार्शल लॉ को हटाने की मांग की गई। लाइव टीवी रिपोर्ट्स के अनुसार, संसद में 300 में से 190 सदस्य उपस्थित थे जब इस प्रस्ताव को पारित किया गया।
विपक्षी नेता का बयान: विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता ने मार्शल लॉ को 'असंवैधानिक' करार देते हुए कहा कि यह कदम लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को कमजोर करता है और देश के संविधान के खिलाफ है।प्रभाव डालने वाले तत्व: मार्शल लॉ की घोषणा ने दक्षिण कोरिया में राजनीतिक हलचल मचा दी है। प्रदर्शनकारियों और विपक्षी नेताओं के विरोध के बावजूद, राष्ट्रपति यून ने इसे संविधानिक व्यवस्था की रक्षा के लिए आवश्यक कदम बताया।
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