बुध प्रदोष पर 11 हजार पार्थिव शिवलिंगों का निर्माण, रुद्राभिषेक से भक्तिमय हुआ महामाया मंदिर
OM Darpan
Aug 07, 2025 01:08 am
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07 Aug 2025
रायपुर।
समग्र ब्राह्मण परिषद् छत्तीसगढ़ ने आज 6 अगस्त को सावन माह के शुक्ल पक्ष की बुध प्रदोष तिथि पर राजधानी रायपुर स्थित श्री महामाया देवी मंदिर के सत्संग भवन सभागार में एक भव्य धार्मिक आयोजन किया। सनातन धर्म के संरक्षण और लोक कल्याण के पावन उद्देश्य से आयोजित इस कार्यक्रम में ग्यारह हजार से अधिक पार्थिव शिवलिंगों का निर्माण कर विधि-विधान से रुद्राभिषेक पूजन किया गया। विगत तीन वर्षों से निरंतर आयोजित हो रहे इस कार्यक्रम में सैकड़ों सनातनी श्रद्धालु भक्तों ने अपने परिवार सहित सहभागिता दर्ज कराई।
पार्थिव शिवलिंग निर्माण प्रक्रिया
संगठन की प्रदेश सचिव अर्चना दीवान एवं कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष शैलेंद्र रिछारिया ने बताया कि बुधवार सुबह 7 बजे से पार्थिव शिवलिंग बनाने का कार्य प्रारंभ हुआ। गाय का गोबर, गुड़, मक्खन और भस्म मिलाकर शोधित व तैयार की गई मिट्टी से “ॐ नम: शिवाय” का उच्चारण करते हुए उपस्थित सभी श्रद्धालुओं ने ग्यारह हजार से अधिक शिवलिंग बनाए। इसके बाद सभी निर्मित पार्थिव शिवलिंगों को श्री सत्संग भवन के सभागार में रुद्राभिषेक पूजन के लिए स्थापित किया गया।भव्य रुद्राभिषेक पूजन विधि
संगठन समाचार प्रभाग के प्रदेश मीडिया प्रभारी उमाकांत तिवारी और रायपुर युवा परिषद् के जिलाध्यक्ष विजय पांडेय ने जानकारी दी कि पूजन का प्रारंभ श्री महामाया देवी मंदिर में प्रतिष्ठित सभी देवी-देवताओं को नारियल, फूल, अक्षत आदि समर्पित कर किया गया। तत्पश्चात सभागार मंच पर स्थापित गौरी-गणेश, कलश, षोडश मातृका, नवग्रह सहित वेदी आदि का आह्वान, प्रतिष्ठापन और षोडशोपचार पूजन संपन्न हुआ। पूजा के अगले क्रम में आचार्य अभय शर्मा, आचार्य मृगांक तिवारी, आचार्य मृदुल तिवारी, आचार्य प्रहलाद मिश्रा और आचार्य सुरेंद्र शर्मा के मार्गदर्शन में सभी श्रद्धालुओं ने पार्थिव शिवलिंगों की विधिपूर्वक पूजा की। यजुर्वेद की शुक्लयजुर्वेद संहिता के ‘रुद्राष्टाध्यायी’ मंत्रों के सस्वर पाठ से दूध, दही, शर्करा, मधुरस, घी और गंगाजल मिश्रित जल से रुद्राभिषेक किया गया। रुद्राभिषेक के बाद भगवान भोलेनाथ का श्रृंगार पूजन किया गया, जिसके उपरांत भगवान भोलेनाथ एवं महामाया माता की महाआरती की गई।बुध प्रदोष व्रत का महत्व और आयोजन का उद्देश्य
संगठन के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. भावेश शुक्ला “पराशर” ने इस आयोजन के विषय में विशेष जानकारी देते हुए बताया कि सनातन धर्म में बुध प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। त्रयोदशी तिथि भगवान शिव को समर्पित है और इस व्रत को करने से संतान सुख प्राप्त होता है, साथ ही जीवन के सभी संकट भी दूर होते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बुध प्रदोष व्रत करने से कुंडली में बुध ग्रह मजबूत होता है और बुध के अशुभ प्रभाव भी दूर होते हैं। समग्र ब्राह्मण परिषद् छत्तीसगढ़ द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम इसका चौथा वार्षिक आयोजन था, जिसमें संपूर्ण पूजन सामग्री संगठन द्वारा नि:शुल्क उपलब्ध कराई गई।भव्य विसर्जन यात्रा और भंडारा
सायंकाल 4 बजे बाजे गाजे और आतिशबाजी के साथ एक विसर्जन झांकी निकाली गई, जिसमें सभी पार्थिव शिवलिंगों को दूधाधारी मंदिर स्थित महाराजबंद तालाब में विसर्जित किया गया। विसर्जन के उपरांत पारंपरिक रूप से सभी श्रद्धालुओं को बिठाकर भंडारा प्रसादी का वितरण किया गया। इस आयोजन में रायपुर जिला, शहर सहित दुर्ग, बालोद, बिलासपुर और छुईखदान के सनातन धर्मानुरागी श्रद्धालु सम्मिलित हुए। कार्यक्रम में श्री महामाया देवी मंदिर सार्वजनिक न्यास के अध्यक्ष व्यासनारायण तिवारी, सचिव दुर्गा प्रसाद पाठक, मंदिर व्यवस्थापक विजय कुमार झा, उपेंद्र शुक्ला, विजयशंकर अग्रवाल एवं न्यासी सदस्यों सहित प्रमिला तिवारी, शैलेंद्र शर्मा, गौरव मिश्रा, विवेक दुबे, श्रीकांत तिवारी, क्रांति कुमार अग्रवाल, कालिंद्री उपाध्याय, राजेश्वरी शर्मा, सीमा दुबे, स्वाति मिश्रा, भारती शर्मा, प्रीति तिवारी, संध्या उपाध्याय, नमिता शर्मा, संजय शर्मा, रामानुज तिवारी, सजल तिवारी, दीपक शुक्ला, चक्रेश तिवारी, अमित जोशी एवं डाली तिवारी, स्वाति शर्मा, उमा चौबे, कृतिका सजल तिवारी, वैभव शर्मा, दिलीप अग्रवाल, मदन यदु, चेतन धीवर, कैलाश पटेल, वैदिक तिवारी का विशेष योगदान रहा।
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