17 सितम्बर 2026 |
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मानव-वन्यजीव टकराव रोकने के लिए केंद्र और राज्य बनाएंगे साझा रणनीति

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OM Darpan

Aug 06, 2026 01:02 am 377 views
मानव-वन्यजीव टकराव रोकने के लिए केंद्र और राज्य बनाएंगे साझा रणनीति
  • संसदीय समिति की बैठक में गूंजा वन्यजीव टकराव का मुद्दा, बनी बड़ी योजना

  • केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में हुई संसदीय परामर्श समिति की बैठक

  • एआई, ड्रोन और डेटा प्रबंधन के जरिए वन्यजीवों के साथ सह-अस्तित्व पर जोर

नई दिल्ली। नई दिल्ली में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में मंत्रालय की संसदीय परामर्श समिति की अहम बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य एजेंडा मानव-वन्यजीव टकराव (एचडब्ल्यूसी) की चुनौतियों पर विचार-विमर्श करना और लोगों व वन्यजीवों के बीच सुरक्षित सह-अस्तित्व सुनिश्चित करने के लिए ठोस उपाय तलाशना था। बैठक में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह, समिति के सांसद सदस्य, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, पीसीसीएफ और विभिन्न राज्यों के मुख्य वन्यजीव वार्डन उपस्थित रहे। इस दौरान 18 दिसंबर 2025 को हुई पिछली बैठक के निर्देशों पर की गई कार्रवाई की समीक्षा की गई और 10 जुलाई 2026 को लॉन्च किए गए राष्ट्रीय मानव-वन्यजीव टकराव पोर्टल की प्रगति पर चर्चा हुई। समिति को प्रधानमंत्री द्वारा घोषित 'मानव-वन्यजीव टकराव उत्कृष्टता केंद्र' (सीओई-एचडब्ल्यूसी) की स्थापना और दक्षिण भारत के लिए हाथी संरक्षण क्षेत्रीय कार्य योजना (आरएपी) की मंजूरी के बारे में भी जानकारी दी गई। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि विभिन्न राज्यों में हाथियों, बाघों, तेंदुओं, भालुओं और अन्य वन्यजीवों के साथ होने वाले टकरावों के लिए स्थान-विशिष्ट प्रबंधन की आवश्यकता है।

आधुनिक तकनीक से लैस होगा निगरानी तंत्र

चर्चा के दौरान जीआईएस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), ड्रोन, रेडियो टेलीमेट्री और भविष्यसूचक विश्लेषण जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर विशेष जोर दिया गया। सदस्यों ने माना कि प्रभावी प्रबंधन के लिए पारिस्थितिक संरक्षण के साथ-साथ मानव जीवन और आजीविका की सुरक्षा अनिवार्य है। इसके लिए अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने और मुआवजा वितरण प्रणाली में सुधार की आवश्यकता जताई गई। बैठक के समापन पर केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि इस चुनौती का समाधान वैज्ञानिक प्रबंधन, संस्थागत समन्वय और स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी से ही संभव है। राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने सुझाव दिया कि पर्यावास की वहन क्षमता का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाना चाहिए ताकि संसाधनों की उपलब्धता के अनुसार रणनीति बनाई जा सके। समिति ने भारत की समृद्ध वन्यजीव विरासत के संरक्षण के लिए राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर प्रयासों को और मजबूत करने का संकल्प लिया।

राज्यों ने साझा किए अपने सफल मॉडल

असम, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश ने अपने राज्यों में अपनाई जा रही रणनीतियों का प्रदर्शन किया। असम ने अपनी भू-भाग आधारित रणनीति और क्षेत्रीय समितियों के गठन पर प्रकाश डाला, जबकि कर्नाटक ने अपने छह-स्तंभ मॉडल और ‘ई-परिहारा’ डिजिटल मुआवजा प्रणाली की जानकारी दी। केरल ने वन्यजीव टकराव को राज्य-विशिष्ट आपदा घोषित कर सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया। मध्य प्रदेश ने ‘रोकथाम प्रथम’ मॉडल के तहत गजरक्षक और बाघ मित्रों की तैनाती की जानकारी दी। उत्तराखंड ने 24x7 हेल्पलाइन और ‘तेंदुओं/बाघों के साथ रहना’ पहल को साझा किया, वहीं उत्तर प्रदेश ने तराई क्षेत्र में तेंदुओं के प्रबंधन के लिए बनाए गए बचाव केंद्रों और सौर बाड़ लगाने के प्रयासों को रेखांकित किया। संसदीय समिति ने इन सभी राज्यों के तकनीकी और सामुदायिक प्रयासों की सराहना की।

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