कोल इंडिया ने समाज कल्याण पर खर्च किए 7276 करोड़ रुपये
OM Darpan
कंपनी ने सांविधिक आवश्यकता से अधिक खर्च कर शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में स्थापित किए नए कीर्तिमान
नई दिल्ली। कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) ने वित्त वर्ष 2014-15 से 2025-26 के दौरान कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के तहत 7,276 करोड़ रुपये व्यय किए हैं। कंपनी ने 5,795 करोड़ रुपये की सांविधिक आवश्यकता की तुलना में अधिक राशि खर्च कर देश के करीब 3.56 करोड़ लोगों के जीवन पर प्रत्यक्ष और परोक्ष प्रभाव डाला है।
सीआईएल के वार्षिक सीएसआर बजट का 80 प्रतिशत हिस्सा खदानों के 25 किलोमीटर के दायरे में आने वाले प्रभावित क्षेत्रों पर खर्च किया जाता है। कंपनी का 90 प्रतिशत से अधिक सीएसआर व्यय कोयला उत्पादक राज्यों में ही होता है ताकि खनन का प्रभाव झेलने वाले स्थानीय समुदायों को सीधा लाभ मिल सके।
खनन प्रभावित क्षेत्रों में बढ़ाए विकास कार्य
कंपनी अधिनियम 2013 लागू होने से पहले भी सीआईएल सामुदायिक विकास नीति 2005 के तहत कल्याणकारी कार्य कर रही थी। वित्त वर्ष 2011-12 में जहां यह खर्च 82 करोड़ रुपये था, वहीं अब वार्षिक व्यय 1,000 करोड़ रुपये के करीब पहुंच गया है।
कोयला मंत्रालय ने 8 सितंबर को क्षेत्र के लिए नई सीएसआर रूपरेखा शुरू की है। इसका उद्देश्य सभी कोयला पीएसयू के कार्यों में एकरूपता, समन्वय और उत्तरदायित्व सुनिश्चित करना है। यह व्यवस्था बाहरी स्वतंत्र संस्थाओं द्वारा प्रभाव मूल्यांकन और सीएजी ऑडिट के माध्यम से संचालित होगी।
शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा में किए बड़े बदलाव
कंपनी ने 'स्वच्छ विद्यालय अभियान' के तहत सरकारी स्कूलों में 50,000 से अधिक शौचालय बनवाए हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र में अंगुल में 500 बिस्तरों वाला मेडिकल कॉलेज और झारसुगुडा में कार्डियक केयर सेंटर स्थापित किया गया है, जिनकी कुल लागत 596 करोड़ रुपये है।
विशिष्ट योजनाओं के तहत 'निर्माण' के माध्यम से 1,300 यूपीएससी उम्मीदवारों को पुरस्कार और 'नन्हा सा दिल' कार्यक्रम से 1,700 बच्चों के हृदय रोगों का उपचार कराया गया है। साथ ही थैलेसीमिया बाल सेवा योजना से 1,000 से अधिक लोगों का अस्थि-मज्जा प्रत्यारोपण संभव हुआ है।
खेल और आजीविका मिशन को मिली गति
झारखंड में खेलगांव स्पोर्ट्स एकेडमी के माध्यम से खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर के 15 पदकों सहित कुल 1,800 पदक जीते हैं। कौशल विकास कार्यक्रमों से पिछले चार वर्षों में 48,000 से अधिक लोगों को लाभ मिला है, जिसमें आदिवासी महिलाओं के लिए पोल्ट्री सहायता और प्लास्टिक इंजीनियरिंग प्रशिक्षण शामिल है।
कंपनी ने डिजिटल शिक्षा के लिए 2,300 स्मार्ट क्लासरूम और 500 लैब शुरू किए हैं। रांची में 5,000 क्षमता वाले राज्य पुस्तकालय का निर्माण और हावड़ा पुल की लाइटिंग जैसे कार्य भी सीआईएल की पहचान बने हैं। ये सभी प्रयास सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में सहायक सिद्ध हो रहे हैं।
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