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नए मोबाइल में 'संचार साथी' जरूरी, WhatsApp के नियम बदले

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OM Darpan

Dec 03, 2025 06:06 am 249 views
नए मोबाइल में 'संचार साथी' जरूरी, WhatsApp के नियम बदले

  • नए फोन में 'संचार साथी' जरूरी, व्हाट्सएप पर सिम बाइंडिंग अनिवार्य

  • टेलीकॉम विभाग का 90 दिनों का अल्टीमेटम

  • साइबर फ्रॉड रोकने के लिए टेलीकम्युनिकेशंस एक्ट के तहत जारी हुए निर्देश

नई दिल्ली.

केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में जारी किए गए दो कड़े निर्देशों ने तकनीकी कंपनियों और स्मार्टफोन निर्माताओं के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। टेलीकॉम विभाग (DoT) ने डिजिटल सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए स्मार्टफोन मेकर्स और OTT कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म्स के लिए नई नियमावली जारी की है। विशेषज्ञों के अनुसार, इन आदेशों का सीधा असर कंपनियों के मौजूदा बिजनेस मॉडल और आम यूजर्स के कम्युनिकेशन अनुभव पर पड़ने की संभावना है।

नए फोन में प्री-इंस्टॉल करना होगा 'संचार साथी'

टेलीकॉम विभाग ने सभी स्मार्टफोन निर्माता कंपनियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि उन्हें अपने नए हैंडसेट में सरकार का साइबर सुरक्षा ऐप ‘संचार साथी’ प्री-इंस्टॉल करना होगा। इसके लिए विभाग ने कंपनियों को 90 दिनों की समय सीमा दी है। आदेश के मुताबिक, निर्माताओं को 120 दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report) जमा करनी होगी। यह कदम उपयोगकर्ताओं को साइबर खतरों से बचाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

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व्हाट्सएप-टेलीग्राम पर अब सिम बाइंडिंग का नियम

स्मार्टफोन के अलावा, व्हाट्सएप (WhatsApp) और टेलीग्राम (Telegram) जैसे OTT कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म्स के लिए भी नियम कड़े कर दिए गए हैं। अब इन ऐप्स को सिम-बाइंडिंग (SIM-binding) नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा। इसका सीधा अर्थ है कि ये ऐप्स केवल उसी सिम कार्ड के साथ कार्य करेंगे, जिसके जरिए उपयोगकर्ता ने पहली बार रजिस्ट्रेशन किया था। यह व्यवस्था वित्तीय ऐप्स (जैसे UPI ऐप्स) में पहले से लागू है, जिसे अब मैसेजिंग ऐप्स के लिए भी अनिवार्य किया जा रहा है।

कंपनियों ने बताया ‘अधिभार’, कानूनी चुनौती की तैयारी

तकनीकी उद्योग ने DoT के इन आदेशों को ‘अधिभार’ करार दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ कंपनियां इन निर्देशों के खिलाफ कानूनी चुनौती देने पर विचार कर रही हैं। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि सिम बाइंडिंग जैसे नियम व्हाट्सएप और अन्य मैसेजिंग ऐप्स के सामान्य वर्कफ्लो में व्यवधान डाल सकते हैं, जिससे यूजर एक्सपीरियंस नकारात्मक रूप से प्रभावित हो सकता है।

सरकार का तर्क: डिजिटल फ्रॉड पर लगाम

टेलीकॉम विभाग ने स्पष्ट किया है कि ये निर्देश 'टेलीकम्युनिकेशंस एक्ट' के तहत जारी किए गए हैं। सरकार का कहना है कि देश में बढ़ते डिजिटल फ्रॉड, स्पैम कॉल्स और साइबर स्कैम्स से निपटने के लिए ये कदम उठाना आवश्यक हो गया था। प्रशासन का मानना है कि प्री-इंस्टॉल्ड सुरक्षा ऐप और सिम बाइंडिंग से ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों में कमी आएगी।

स्पष्टता की दरकार

भले ही सुरक्षा के लिहाज से ये कदम महत्वपूर्ण माने जा रहे हों, लेकिन विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि इन आदेशों में अभी भी कई बिंदुओं पर स्पष्टता का अभाव है। विशेष रूप से यूजर्स की प्राइवेसी की गारंटी, लागू करने में आने वाली तकनीकी जटिलताएं और कंपनियों के दैनिक संचालन पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।

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