पश्चिम मेदिनीपुर में धान के खेत से मिले दो बच्चों समेत तीन हाथियों के शव, करंट लगने की आशंका
OM Darpan
शव परीक्षण रिपोर्ट से खुलेगा मौत का राज, अवैध बिजली कनेक्शन की भी हो रही जांच
पिराकाटा। पिराकाटा वन क्षेत्र के रंजा बीट अंतर्गत हरतारा इलाके में रविवार सुबह धान के खेत से दो बच्चों समेत तीन हाथियों के शव एक साथ मिलने से हड़कंप मच गया। प्रारंभिक तौर पर आशंका जताई जा रही है कि तीनों हाथियों की मौत बिजली का करंट लगने से हुई है, हालांकि मौत के वास्तविक कारण की पुष्टि शव परीक्षण की रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।
शनिवार रात जंगल से सटे इलाके में हाथियों के चिंघाड़ने की आवाजें लगातार सुनाई देती रहीं। स्थानीय निवासी बामपद दास ने बताया कि शनिवार रात इलाके में हाथियों का झुंड मौजूद था और उन्होंने काफी देर तक हाथियों की चिंघाड़ सुनी थी। उन्हें आशंका हुई कि हाथियों का झुंड धान के खेतों में पहुंच गया है। रविवार सुबह जब लोग खेतों की ओर गए तो वहां तीन हाथियों के शव पड़े मिले और इसके बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए तथा वन विभाग को सूचना दी गई। तीन हाथियों की एक साथ मौत की खबर फैलते ही करीब 10 से 15 किलोमीटर दूर स्थित गांवों से भी लोग घटनास्थल पर पहुंच गए।
बिजली तार और पंप कनेक्शन की जांच
घटनास्थल का निरीक्षण करने पहुंचे वन विभाग के अधिकारियों ने पाया कि जिस स्थान पर हाथियों के शव पड़े थे, उसके ऊपर से बिजली का तार गुजर रहा था। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह बिजली कनेक्शन खेत में कृषि कार्य के लिए पानी का पंप चलाने के लिए लगाया गया था। वन विभाग की टीम अब यह पता लगाने में जुटी है कि क्या हाथी इसी तार के संपर्क में आने से करंट की चपेट में आए थे।
मेदिनीपुर के प्रभागीय वन अधिकारी जोन्स जस्टिन ने बताया कि प्रारंभिक जांच में तीनों हाथियों की मौत करंट लगने से होने की आशंका है, लेकिन पूरे मामले की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि बिजली का तार यदि अवैध तरीके से लगाया गया था तो उससे संबंधित जांच पिराकाटा वन क्षेत्र के अधिकार क्षेत्र से अलग हो सकती है। इसके बावजूद वन अधिकारी यह पता लगा रहे हैं कि बिजली कनेक्शन और हाथियों की मौत के बीच कोई सीधा संबंध है या नहीं। तीनों हाथियों के शवों का शव परीक्षण कराने की तैयारी की जा रही है और बिजली कनेक्शन वैध था या अनधिकृत, इसकी भी जांच की जा रही है।
ग्रामीणों की मांग और पुरानी चिंताएं
एक अन्य स्थानीय निवासी कार्तिक देबसिंह ने कहा कि मानसून के दौरान खेतों में बिजली के कनेक्शन को लेकर विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। ग्रामीणों के मुताबिक, करीब 30 से 40 हाथियों का झुंड अक्सर इस इलाके में आता है। स्थानीय लोगों ने वन विभाग से क्षेत्र में निगरानी बढ़ाने और हाथियों की आवाजाही पर नजर रखने के लिए आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराने की मांग की है। साथ ही खेतों से गुजरने वाली बिजली की लाइनों की भी जांच कराने की मांग उठाई गई है।
ग्रामीणों ने इस घटना को बेहद दुखद बताते हुए वन विभाग और संबंधित अधिकारियों से आवश्यक बचाव उपाय करने की अपील की है, ताकि भविष्य में हाथियों की जान को खतरा न हो। जंगलमहल क्षेत्र में हाथियों के बिजली की चपेट में आने की घटनाएं पहले भी चिंता का विषय रही हैं। रिहायशी इलाकों और खेतों में हाथियों की बढ़ती आवाजाही के बीच बिजली की लाइनों की सुरक्षा तथा हाथी गलियारों को सुरक्षित रखने की मांग लगातार उठती रही है और पिराकाटा की घटना ने एक बार फिर इस समस्या को सामने ला दिया है।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि तीनों हाथी किस परिस्थिति में बिजली के तार के संपर्क में आए और उनकी मौत का सीधा कारण करंट लगना ही था या नहीं। बिजली कनेक्शन की स्थिति और शव परीक्षण रिपोर्ट सामने आने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। दो कम उम्र के हाथियों समेत तीन हाथियों की एक साथ मौत से हरतारा और आसपास के गांवों में शोक का माहौल है।
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