SIR पर निशिकांत दुबे का कांग्रेस पर पलटवार, बोले- नेहरू भी चाहते थे हर 6 महीने पुनरीक्षण
OM Darpan
कांग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए भाजपा सांसद ने पुराने चुनावी उदाहरणों का दिया हवाला
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्तों को लेकर भी उठाए सवाल
नई दिल्ली। देशभर में जारी विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर विवाद और धांधली के आरोपों के बीच भाजपा के वरिष्ठ नेता और गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस पर पलटवार किया है। SIR पर निशिकांत दुबे ने ऐतिहासिक तथ्यों और पूर्व चुनावी उदाहरणों का हवाला देते हुए कांग्रेस के आरोपों पर सवाल उठाए।
निशिकांत दुबे ने दावा किया कि 1951 के निर्वाचन कानून में हर छह महीने में SIR कराने का प्रावधान था। उन्होंने कहा कि देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू भी इस व्यवस्था के पक्षधर थे और नियमित रूप से इसे लागू कराना चाहते थे।
नेहरू को लेकर दुबे ने किया दावा
भाजपा सांसद के मुताबिक, पंडित जवाहरलाल नेहरू हर छह महीने में SIR कराना चाहते थे, लेकिन उस समय वित्तीय संसाधनों की कमी के कारण इस प्रक्रिया को आगे के लिए टालना पड़ा।
SIR को लेकर कांग्रेस की ओर से उठाए जा रहे सवालों के जवाब में दुबे ने चुनावी निष्पक्षता और संवैधानिक संस्थाओं को लेकर भी कांग्रेस पर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का इतिहास खुद संवैधानिक संस्थाओं के राजनीतिक इस्तेमाल का रहा है।
पूर्व चुनाव आयुक्तों के नाम गिनाए
निशिकांत दुबे ने अपने बयान में निर्वाचन आयोग में सेवाएं दे चुके कुछ पूर्व अधिकारियों और मुख्य चुनाव आयुक्तों का भी जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि वी. एस. रमादेवी को निर्वाचन आयोग में सेवाएं देने के बाद हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल बनाया गया।
दुबे ने एम. एस. गिल का नाम लेते हुए कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त का पद छोड़ने के बाद वह कांग्रेस में शामिल हुए और केंद्र सरकार में मंत्री बने।
उन्होंने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टी. एन. शेषण का भी जिक्र किया और कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर गांधीनगर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा।
कांग्रेस पर साधा निशाना
इन उदाहरणों का हवाला देते हुए निशिकांत दुबे ने कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस खुद इस तरह की परिपाटी की जन्मदाता और वाहक रही है, इसलिए उसे दूसरों पर उंगली उठाने का नैतिक अधिकार नहीं है।
SIR को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच भाजपा सांसद ने अपने बयान में नेहरू के समय की व्यवस्था से लेकर पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्तों तक का जिक्र करते हुए कांग्रेस के आरोपों का जवाब दिया।
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