आधुनिक युद्ध सिर्फ हथियारों का नहीं, साइबर और स्पेस तकनीक की भी अहम भूमिका
OM Darpan

राष्ट्रपति ने कहा, फैसले लेने में एआई पर पूरी तरह निर्भरता ठीक नहीं, सेना और वैज्ञानिकों के बीच तालमेल पर जोर
नई दिल्ली।
सुरक्षा और तकनीक के मोर्चे पर तेजी से बदल रही दुनिया में अब युद्ध केवल पारंपरिक मैदानों तक सीमित नहीं रह गए हैं। साइबर, अंतरिक्ष और बायोटेक्नोलॉजी जैसे नए क्षेत्रों ने राष्ट्रीय सुरक्षा के मायने पूरी तरह से बदल दिए हैं। राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया है कि इन नई और जटिल चुनौतियों से निपटने के लिए अब सशस्त्र बलों और देश के वैज्ञानिक संस्थानों को एक साथ मिलकर काम करना होगा।
कम लागत वाली तकनीक बनेगी ढाल
अपने एक अहम संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि आज रणनीतिक दूरदृष्टि, बदलते हालातों में ढलने और तेजी से फैसले लेने की क्षमता वक्त की सबसे बड़ी मांग है। हाल के वैश्विक संघर्षों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि हमें ऐसी कम लागत वाली तकनीकों पर फोकस करना होगा, जो अत्याधुनिक रक्षा प्रणालियों के साथ मिलकर संसाधनों का सबसे शानदार इस्तेमाल सुनिश्चित कर सकें। उन्होंने साफ किया कि आज राष्ट्रीय सुरक्षा का दायरा सिर्फ सैन्य ताकत तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसके लिए रिसर्च, इनोवेशन और सरकारी योजनाओं को व्यावहारिक रूप देना बेहद जरूरी है।
एआई पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं
विज्ञान और अर्थव्यवस्था के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते दखल पर भी राष्ट्रपति ने अहम टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि तकनीक का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है, लेकिन किसी भी संवेदनशील मामले में फैसले लेने के लिए पूरी तरह से एआई पर निर्भर नहीं रहा जा सकता। इसके उपयोग में इंसानी समझ और संतुलित दृष्टिकोण का होना बहुत जरूरी है।
मजबूत अर्थव्यवस्था है सुरक्षा का आधार
आर्थिक मोर्चे पर देश की मजबूती को रेखांकित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि एक सुदृढ़ अर्थव्यवस्था ही राष्ट्रीय सुरक्षा के पूरे ढांचे का असली आधार है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय अर्थव्यवस्था ने बाहरी झटकों और वैश्विक बाधाओं को न सिर्फ झेला है, बल्कि उनसे मजबूती से उबर कर अपनी क्षमता का लोहा भी मनवाया है। सबसे खास बात यह है कि देश ने यह मुकाम अपनी रणनीतिक आज़ादी से बिना कोई समझौता किए हासिल किया है।
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