सरकारी बंगले पर 'नेताजी' का कब्जा! सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद अब ब्याज समेत चुकाने होंगे 21 लाख रुपए
OM Darpan
Jul 23, 2025 08:57 am
395 views
23 Jul 2025
नई दिल्ली/पटना।
अपने रसूख के दम पर सरकारी आवास पर कब्जा जमाए बैठे बिहार के एक पूर्व विधायक की हेकड़ी सुप्रीम कोर्ट ने निकाल दी है। अदालत ने न केवल पूर्व विधायक अविनाश कुमार सिंह को कड़ी फटकार लगाई, बल्कि पटना हाईकोर्ट के उस फैसले को भी सही ठहराया जिसमें उन्हें आवास खाली करने और बकाया किराया चुकाने का आदेश दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट की इस सख्ती के बाद पूर्व विधायक को अपनी याचिका वापस लेनी पड़ी।
यह मामला उस समय सुर्खियों में आया जब चीफ जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई, जस्टिस के विनोद चंद्रन और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने मामले की सुनवाई की। बेंच ने दो टूक शब्दों में कहा कि हाईकोर्ट के फैसले में कुछ भी गलत नहीं है और सरकार कानून के अनुसार कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है।
'नेता जी' को चुकानी होगी 21 लाख की भारी रकम
सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें पूर्व विधायक अविनाश कुमार सिंह को सरकारी आवास में निर्धारित अवधि से अधिक समय तक रहने के कारण लगभग 21 लाख रुपए का बकाया किराया चुकाने को कहा गया था। सीजेआई बीआर गवई की अध्यक्षता वाली बेंच ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता को 20,98,757 रुपये की राशि पर 24 अगस्त 2016 से भुगतान की तारीख तक 6% वार्षिक ब्याज भी देना होगा। यह ब्याज इसलिए लगाया गया है क्योंकि उन्होंने स्पष्ट आदेशों के बावजूद न तो आवास खाली किया और न ही किराया चुकाया।क्या है पूरा मामला?
यह कहानी शुरू हुई थी साल 2006 में, जब अविनाश कुमार सिंह को विधायक के रूप में एक सरकारी आवास आवंटित किया गया था। वे 2015 तक इस आवास में बने रहे। नवंबर 2015 में, जब उनकी विधायकी समाप्त हो गई, तो सरकार ने उन्हें आवास खाली करने के लिए कहा क्योंकि यह घर एक मंत्री को आवंटित किया जाना था। लेकिन 'नेताजी' ने आवास खाली करने के बजाय कानूनी दांव-पेंच का सहारा लिया। उन्होंने पहले हाईकोर्ट में एक रिट याचिका दायर की, जिसे बाद में बिना शर्त वापस ले लिया। फिर जबरन बेदखली के खिलाफ एक दीवानी मुकदमा भी दायर किया और उसे भी वापस ले लिया। जब कानूनी रास्ते बंद होने लगे तो अगस्त 2016 में सरकार ने उन्हें बकाया किराए की राशि का नोटिस थमा दिया। इसके खिलाफ याचिकाकर्ता ने एक और रिट याचिका दायर की, जिसे जनवरी 2021 में खारिज कर दिया गया। इस आदेश के खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में अपील की, लेकिन वहां भी उन्हें फटकार का सामना करना पड़ा और बेंच ने बकाया किराया वसूलने के आदेश को सही ठहराया। अब सुप्रीम कोर्ट ने भी इस फैसले पर अपनी मुहर लगा दी है, जिससे पूर्व विधायक के लिए सभी रास्ते बंद हो गए हैं।
Tags
जरूरी खबरें
विज्ञापन