बाल अधिकारों की सुरक्षा: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कसेगा शिकंजा
OM Darpan
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राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने जारी किए सख्त निर्देश, सुरक्षा बढ़ाने पर जोर
नई दिल्ली।
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने एक महत्वपूर्ण बैठक में गूगल, यूट्यूब, मेटा, एक्स, स्नैपचैट, शेयरचैट, रेडिट और बंबल सहित प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को बच्चों और उनके अधिकारों की सुरक्षा के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इस बैठक में बच्चों की उम्र सत्यापन प्रणाली, प्लेटफार्मों पर सुरक्षा उपकरणों के सुदृढ़ीकरण, और सीएसएएम (चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मैटेरियल) की पहचान और रिपोर्टिंग पर सहमति बनी।
कानूनगोप ने कहा कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों के समर्थन, डीप फेक और शिकारियों की पहचान के लिए उपकरण विकसित करने, और पीड़ितों की गोपनीयता बनाए रखने से संबंधित उपायों पर भी सहमति हुई है। इसके अलावा, नाबालिगों के सोशल मीडिया अनुबंधों के लिए माता-पिता या कानूनी अभिभावकों की सहमति आवश्यक होगी।
यह निर्देश सीपीसीआर अधिनियम, 2005 के तहत दिए गए हैं, जिसमें सोशल मीडिया प्लेटफार्मों से पॉक्सो अधिनियम की धारा 11 और किशोर न्याय अधिनियम की धारा 75 का पालन सुनिश्चित करने की अपील की गई है। सभी प्लेटफॉर्म को जनवरी 2024 से जून 2024 की अवधि के लिए नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइटेड चिल्ड्रन (एनसीएमईसी) को केस डाटा प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
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