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भाषाओं की रक्षा ही सभ्यता की रक्षा: उपराष्ट्रपति

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OM Darpan

Jan 10, 2026 12:04 am 525 views
भाषाओं की रक्षा ही सभ्यता की रक्षा: उपराष्ट्रपति

नई दिल्ली | ओमदर्पण न्यूज़ डेस्क

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने शुक्रवार को नई दिल्ली में 'भारतीय भाषाओं पर तीसरे अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन' का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने देश की भाषाई विविधता को राष्ट्र की एकता का आधार बताया। उपराष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि भारत की अनेक भाषाओं ने कभी देश को विभाजित नहीं किया, बल्कि एक साझा धर्म और संस्कृति की रक्षा करते हुए राष्ट्र को एकजुट रखा है।

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यह सम्मेलन वैश्विक हिंदी परिवार, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग परिषद, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र और दिल्ली विश्वविद्यालय के भारतीय भाषा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया।

सभ्यता की अंतरात्मा है भाषा

देश-विदेश से आए विद्वानों और भाषाविदों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने भाषा को 'सभ्यता की अंतरात्मा' करार दिया। उन्होंने कहा कि भाषाएं पीढ़ियों तक सामूहिक स्मृति, ज्ञान और मूल्यों को संजोए रखती हैं। प्राचीन शिलालेखों और ताड़ के पत्तों की पांडुलिपियों से लेकर आज की डिजिटल लिपियों तक, भाषाओं ने ही दर्शन, विज्ञान और नैतिक परंपराओं को संरक्षित किया है।

संसद में गूंज रहीं मातृभाषाएं

राज्यसभा सभापति के रूप में अपने अनुभव साझा करते हुए उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने कहा कि अब संसद में बदलाव दिख रहा है। अधिकाधिक सांसद अपनी मातृभाषा में विचार रख रहे हैं। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा हाल ही में संथाली भाषा में संविधान का अनुवाद जारी किए जाने को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र तभी फलता-फूलता है जब हर नागरिक अपनी भाषा में खुद को व्यक्त कर सके।

लुप्तप्राय भाषाओं पर चिंता और तकनीक का उपयोग

समकालीन चुनौतियों पर बात करते हुए उपराष्ट्रपति ने चेतावनी दी कि दुनिया भर में कई स्वदेशी भाषाएं लुप्तप्राय हैं। उन्होंने एआई (AI) आधारित अनुवाद और डिजिटल आर्काइव जैसी तकनीक को भाषा संरक्षण में सहयोगी बनाने का आह्वान किया। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 'ज्ञान भारतम मिशन' और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की सराहना की, जो बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा दे रही है।

कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल 'निशंक', इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष राम बहादुर राय और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग परिषद के महासचिव श्याम परांदे सहित कई गणमान्य अतिथि मंच पर मौजूद रहे।

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