ग्रामीण महिलाएं अब केवल लाभार्थी नहीं, विकास की वाहक और संपत्ति निर्माता हैं - राष्ट्रपति
OM Darpan

विजयवाड़ा-
ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और स्वयं-सहायता समूहों की सफलता को रेखांकित करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा है कि गांव की महिलाएं अब केवल सरकारी योजनाओं की लाभार्थी नहीं रही हैं। वे अब वेल्थ क्रिएटर (संपत्ति निर्माता) और देश के विकास की नई वाहक बन गई हैं। गुरुवार को आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में आयोजित 'राष्ट्रीय सरस मेले' में शिरकत करते हुए राष्ट्रपति ने यह बातें कहीं। इस दौरान उन्होंने मेला परिसर में लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण किया और देश के विभिन्न हिस्सों से आईं 'लखपति दीदियों' के साथ सीधा संवाद भी किया।
10 करोड़ से अधिक महिलाओं ने बदली तस्वीर
राष्ट्रपति मुर्मू ने बताया कि बीते 12 वर्षों में स्वयं-सहायता समूहों से जुड़ने वाली महिलाओं की संख्या 10 करोड़ के आंकड़े को पार कर गई है। मौजूदा समय में 90 लाख से अधिक ऐसे समूह काम कर रहे हैं, जो ग्रामीण जीवन में एक बड़ा बदलाव ला रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि कृषि क्षेत्र में महिलाओं की अहम हिस्सेदारी है और इन समूहों के जरिए उन्हें वित्तीय, तकनीकी व सामाजिक रूप से सशक्त होने की एक नई दिशा मिली है। महिलाएं अब अपने परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधारने के साथ-साथ आर्थिक फैसले भी ले रही हैं, जो देश के महिला-केंद्रित और समावेशी विकास के लिए बेहद जरूरी है।
सशक्तीकरण के लिए अभी लंबा सफर है बाकी
केंद्र सरकार की 'लखपति दीदी' योजना को एक अहम पहल बताते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि डिजिटल सेवाओं और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे आधुनिक क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी से उनके कौशल को नए आयाम मिले हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि सशक्तीकरण की इस यात्रा में अभी एक लंबा सफर तय किया जाना बाकी है। असली सशक्तीकरण का पैमाना यह होना चाहिए कि महिलाओं का अपनी आय और संपत्ति पर कितना अधिकार बढ़ा है। उन्होंने घरेलू देखभाल के दायित्वों में सामुदायिक व्यवस्थाओं को बढ़ावा देने और जलवायु-अनुकूल रोजगारों में महिलाओं की सहभागिता बढ़ाने पर भी जोर दिया।
देशभर के उपभोक्ताओं से जुड़ रहीं महिला उद्यमी
सरस मेलों की उपयोगिता का जिक्र करते हुए मुर्मू ने कहा कि ये मेले ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाले उन्नत हाट के रूप में स्थापित हो चुके हैं। इसके माध्यम से ग्रामीण महिला उद्यमियों को पूरे देश के उपभोक्ताओं के साथ सीधे-सीधे जुड़ने का मौका मिल रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करने के लिए विकास का लाभ हर गांव और हर घर तक पहुंचना आवश्यक है, जिसमें इन समूहों और मेलों को अग्रणी भूमिका निभानी होगी।
31 अक्तूबर तक चलेगा मेला
गौरतलब है कि केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय और आंध्र प्रदेश सरकार के सहयोग से आयोजित इस राष्ट्रीय सरस मेले में 34 राज्यों व केंद्र-शासित प्रदेशों की लगभग 1500 महिला उद्यमी और लखपति दीदियां हिस्सा ले रही हैं। मेले में 650 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं, जहां वे अपने उत्पादों का प्रदर्शन कर रही हैं। आम जनता के लिए यह मेला आगामी 31 अक्तूबर तक खुला रहेगा।
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