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"क्या घुसपैठियों के लिए 'रेड कार्पेट' बिछाएं?" रोहिंग्या मामले में सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी

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OM Darpan

Dec 03, 2025 06:29 am 173 views
"क्या घुसपैठियों के लिए 'रेड कार्पेट' बिछाएं?" रोहिंग्या मामले में सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी

  • 5 लापता रोहिंग्याओं की याचिका पर सुनवाई

  • CJI ने कहा- सुरंगों से घुसते हैं, फिर मांगते हैं अधिकार

नई दिल्ली.

सुप्रीम कोर्ट ने 5 लापता रोहिंग्या नागरिकों का पता लगाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए बेहद कड़े सवाल उठाए हैं। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने बुधवार को स्पष्ट शब्दों में पूछा कि क्या अवैध रूप से देश में घुसने वालों का स्वागत 'रेड कार्पेट' बिछाकर किया जाना चाहिए। कोर्ट ने सीमाओं की सुरक्षा और देश के संसाधनों पर नागरिकों के अधिकार को लेकर गंभीर चिंता जाहिर की है।

सुरंगों के रास्ते घुसपैठ और अधिकारों की मांग

सुनवाई के दौरान CJI ने कहा कि उत्तर भारत की सीमाएं सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील हैं। उन्होंने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि घुसपैठिए अक्सर सुरंगों के रास्ते देश में प्रवेश करते हैं। अवैध तरीके से दाखिल होने के बाद वे भोजन, आश्रय और बच्चों की शिक्षा के अधिकार की मांग करने लगते हैं। पीठ ने सवाल किया कि क्या कानून का दायरा इतना खींचा जाना चाहिए? साथ ही कोर्ट ने यह भी पूछा कि क्या हमारे अपने बच्चे इन सुविधाओं के हकदार नहीं हैं?

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'शरणार्थी' दर्जे पर केंद्र से सवाल

पीठ ने केंद्र सरकार से पूछा कि क्या कोई ऐसा आधिकारिक आदेश मौजूद है जो रोहिंग्या समुदाय को 'शरणार्थी' घोषित करता हो। कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि यदि कोई व्यक्ति बिना किसी कानूनी दर्जे के अवैध रूप से देश में आया है, तो क्या उसे यहां रखने का हमारा कोई दायित्व बनता है?

याचिका पर बहस और आपत्ति

याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि उनका उद्देश्य निर्वासन को रोकना नहीं है, बल्कि कस्टडी से गायब होने की आशंका के चलते वे सुप्रीम कोर्ट से न्याय मांग रहे हैं। वकील ने कहा कि किसी को अवैध रूप से "ट्रैफिक आउट" नहीं किया जा सकता।

इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जनहित याचिका (PIL) का विरोध करते हुए कहा कि इस पर सुनवाई नहीं होनी चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि प्रभावित व्यक्ति या उनका परिवार खुद कोर्ट आ सकता है। CJI ने इस संदर्भ में हेबियस कॉरपस (बंदी प्रत्यक्षीकरण) जैसी मांगों को "काफी कल्पनात्मक" करार दिया।

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