रायचूर से बल्लारी तक नौ विधानसभा क्षेत्रों से गुजरेगी विपक्ष की पदयात्रा, भ्रष्टाचार के मुद्दे पर घेरेगी सरकार
OM Darpan
Aug 30, 2026 01:50 am
1,019 views
30 Aug 2026
✍️ डिजिटल डेस्क
बेंगलुरु | कर्नाटक में कथित 89 करोड़ रुपये के वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम घोटाले को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। मंत्री बी. नागेंद्र के इस्तीफे के बावजूद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पीछे हटने से इनकार कर दिया है। भाजपा और जनता दल (सेक्युलर) गठबंधन ने अपनी प्रस्तावित 10 दिवसीय पदयात्रा को जारी रखने का फैसला किया है। यह पदयात्रा 1 सितंबर से शुरू होकर 10 सितंबर तक चलेगी, जिसमें विपक्ष कांग्रेस सरकार की नीतियों और कथित विफलताओं को जनता के बीच लेकर जाएगा।
लिंगसुगुर से बल्लारी तक 10 दिन का सियासी संग्राम
विपक्ष की यह पदयात्रा 1 सितंबर को लिंगसुगुर से शुरू होगी और 10 सितंबर को बल्लारी शहर में एक बड़े विरोध प्रदर्शन के साथ समाप्त होगी। रायचूर से शुरू होकर बल्लारी तक जाने वाली यह यात्रा कुल नौ विधानसभा क्षेत्रों को कवर करेगी। इस दौरान पदयात्रा के रास्ते में मस्की, सिंधनूर, हनचल कैंप, कनकगिरी, गंगावती, कम्मली, संदूर और बल्लारी ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र शामिल रहेंगे।मैदान में उतरेंगे प्रल्हाद जोशी और एच. डी. कुमारस्वामी
इस आंदोलन को धार देने के लिए केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी और एच. डी. कुमारस्वामी भी पदयात्रा में शामिल होकर मोर्चा संभालेंगे। भाजपा नेताओं का स्पष्ट कहना है कि उनका आंदोलन केवल एक मंत्री के इस्तीफे तक सीमित नहीं है। हालांकि विपक्षी खेमा नागेंद्र के इस्तीफे को अपनी शुरुआती सफलता मान रहा है, लेकिन अब उनका निशाना पूरी कांग्रेस सरकार की कार्यशैली पर है।कांग्रेस ने भाजपा के दावे को नकारा
दूसरी तरफ, कांग्रेस ने भाजपा के जीत के दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बी. के. हरिप्रसाद ने पलटवार करते हुए कहा कि नागेंद्र ने सार्वजनिक जीवन में नैतिक जिम्मेदारी समझते हुए इस्तीफा दिया है। हरिप्रसाद ने जोर देकर कहा कि इसे भाजपा के संघर्ष की जीत बताना पूरी तरह गलत है। इस जुबानी जंग और आगामी पदयात्रा ने संकेत दे दिए हैं कि कर्नाटक की राजनीति में आने वाले दिनों में टकराव और तेज होने वाला है।जरूरी खबरें
विज्ञापन