20 सितम्बर 2026 |
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वैन ड्राइवर की 15 साल की बेटी ने रचा इतिहास: सिर्फ 'मजे' के लिए शुरू की थी तैराकी, अब रायपुर में गोल्ड जीतकर बन गई देश की सनसनी

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OM Darpan

Mar 26, 2026 08:41 pm 216 views
वैन ड्राइवर की 15 साल की बेटी ने रचा इतिहास: सिर्फ 'मजे' के लिए शुरू की थी तैराकी, अब रायपुर में गोल्ड जीतकर बन गई देश की सनसनी

रायपुर (ओमदर्पण न्यूज़)। कभी-कभी जीवन की दिशा एक छोटे से निर्णय से बदल जाती है। ओडिशा की 15 वर्षीय अंजलि मुंडा की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। वर्ष 2022 में कक्षा में खेल चयन के दौरान उन्होंने तैराकी को चुना—एक ऐसा खेल जिसे वे उस समय सिर्फ मनोरंजन के रूप में जानती थीं। आज, वही निर्णय उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर एक ऐतिहासिक उपलब्धि तक ले आया है।

ओडिशा के जाजपुर जिले के गहिरागड़िया गांव की रहने वाली अंजलि ने राजधानी रायपुर में आयोजित पहले 'खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026' में 200 मीटर फ्रीस्टाइल स्पर्धा में 2:39.02 सेकंड का समय निकालकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया है। इसके साथ ही वे इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता की पहली महिला स्वर्ण पदक विजेता बन गई हैं।

साधारण पृष्ठभूमि से असाधारण तक का सफर

अंजलि एक बेहद साधारण पृष्ठभूमि से आती हैं। चार भाई-बहनों में सबसे छोटी अंजलि के पिता एक स्थानीय फैक्ट्री में वैन चालक हैं। 10 वर्ष की आयु में अंजलि कलिंगा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज से जुड़ीं, जहां उन्हें निःशुल्क शिक्षा और प्रशिक्षण मिला। यहीं से उनके खेल करियर की मजबूत नींव पड़ी।

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शुरुआत में वे अपनी बड़ी बहन से प्रेरित थीं, जो तीरंदाजी में सक्रिय हैं, लेकिन अंजलि ने खुद के लिए तैराकी का मार्ग चुना। उनकी मेहनत जल्द ही रंग लाई और तैराकी शुरू करने के एक वर्ष के भीतर ही उन्होंने एक स्थानीय प्रतियोगिता में रजत पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा लिया।

'अस्मिता लीग' से बढ़ा आत्मविश्वास, अब नजर रिकॉर्ड पर

अंजलि अपनी इस सफलता का पूरा श्रेय अपने कोचों और खेल मंत्रालय की ‘अस्मिता लीग’ पहल को देती हैं। वर्ष 2024 में संभलपुर में आयोजित इस लीग में उन्होंने दो रजत पदक जीते थे, जिससे उनका आत्मविश्वास काफी बढ़ा। इसके बाद गुवाहाटी में आयोजित अस्मिता स्विमिंग लीग (ईस्ट जोन) में भी उन्होंने दो रजत पदक हासिल किए थे।

हालांकि, इस बड़ी उपलब्धि के बावजूद अंजलि अभी संतुष्ट नहीं हैं। उनका अगला लक्ष्य अपने 2:25 सेकंड के व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय (Personal Best) को और बेहतर करना है। लगातार यात्रा और थकान के बावजूद रायपुर में उन्होंने अपने प्रदर्शन से सभी को प्रभावित किया है।

अब अंजलि की नजर आगामी स्पर्धाओं— 50 मीटर बैकस्ट्रोक, 100 मीटर बैकस्ट्रोक और 200 मीटर इंडिविजुअल मेडली— पर है, जहां वे अपने प्रदर्शन को और बेहतर करने के मजबूत इरादे से पूल में उतरेंगी। उनकी यह सफलता दर्शाती है कि सही अवसर और मार्गदर्शन मिलने पर ग्रामीण प्रतिभाएं किस तरह नई ऊंचाइयों को छू सकती हैं।


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