सुदामा कथा पर झूम उठा उरला, भक्तिभाव में डूबे सैकड़ों श्रोता
OM Darpan
Nov 05, 2025 08:23 am
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05 Nov 2025
उरला (सत्यानंद सोई)।
उरला में चल रही सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का सातवां दिन मित्रता के सर्वोच्च आदर्श के नाम रहा। मुख्य कथावाचक पंडित परमानन्द शास्त्री मढ़ी वाले ने सातवें दिन भगवान कृष्ण की विभिन्न लीलाओं का वर्णन करने के बाद सुदामा चरित्र का बखान किया। उन्होंने कहा कि मित्रता कैसे निभाई जाए, यह श्री कृष्ण सुदामा जी से समझ सकते हैं।
मर्यादा तोड़कर मित्र से मिले द्वारकाधीश
पंडित परमानन्द शास्त्री ने सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए बताया कि जब सुदामा द्वारिकाधीश के महल का पता पूछकर महल की ओर बढ़ने लगे, तब द्वार पर खड़े द्वारपालों ने उन्हें भिक्षा मांगने वाला समझकर रोक दिया। सुदामा ने द्वारपालों से कहा कि वह कृष्ण के मित्र हैं। द्वारपाल ने महल के भीतर जाकर प्रभु से बताया कि कोई व्यक्ति उनसे मिलने आया है और अपना नाम सुदामा बता रहा है।मित्र का नाम सुनते ही दौड़े कृष्ण
जैसे ही द्वारपाल के मुख से कृष्ण ने सुदामा का नाम सुना, वह सुदामा-सुदामा पुकारते हुए तेजी से द्वार की तरफ भागे। सामने अपने सखा सुदामा को देखकर उन्होंने सुदामा जी को सीने से लगा लिया। सुदामा ने भी कन्हैया-कन्हैया कहकर उन्हें गले लगाया। यह दृश्य अत्यंत मार्मिक था। कृष्ण अपने मित्र सुदामा को आदरपूर्वक अपने महल में ले गए और उनका अभिनंदन किया।भावविभोर हुए श्रोता, हुई पुष्पवर्षा
इस हृदयस्पर्शी दृश्य को देखकर कथा में मौजूद सैकड़ों श्रोता भावविभोर हो गए। उन्होंने कृष्ण और सुदामा की झांकी पर फूलों की वर्षा की। कथा समाप्त होने के बाद कुम्हार परिवार के सभी सदस्यों की उपस्थिति में पूजा आरती की गई और इसके बाद प्रसाद वितरण किया गया। इस दौरान सैकड़ों गणमान्य नागरिक मौजूद थे।
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