15 सितम्बर 2026 |
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सिलतरा में श्मशान भूमि पर अवैध कब्जे के खिलाफ ग्रामीण का आमरण अनशन, भाजपा नेता ने साधा उद्योगों और प्रशासन पर निशाना

OM Darpan

Aug 17, 2025 05:26 am 362 views
सिलतरा में श्मशान भूमि पर अवैध कब्जे के खिलाफ ग्रामीण का आमरण अनशन, भाजपा नेता ने साधा उद्योगों और प्रशासन पर निशाना
रायपुर/ सिलतरा (सत्यानंद सोई)। सिलतरा गांव में श्मशान भूमि पर लगातार हो रहे कब्जे, उसकी दुर्गति और बिना अनुमति टावर खड़ा करने के विरोध में स्थानीय निवासी कोमल यदु ने आमरण अनशन शुरू कर दिया है। यह अनशन लगातार दूसरे दिन भी जारी रहा, जिसे ग्रामीणों का व्यापक समर्थन मिल रहा है। इस विरोध प्रदर्शन में ग्रामीणों को भाजपा मंडल अध्यक्ष और पूर्व जिला पंचायत सदस्य राकेश यादव का साथ मिला। यादव ने मौके पर पहुंचकर अपना बयान जारी करते हुए कहा कि श्मशान भूमि पर जो मार्कपोल लग रहा है, उसे स्थानांतरित किया जा सकता है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जो श्मशान घाट कभी 7 एकड़ में फैला था, वह आज मात्र 1 एकड़ में सिमट गया है और डस्ट व राखड़ से भरा पड़ा है। ऐसी दयनीय और सोचनीय दुर्दशा सिलतरा जैसे गांव की है, जिसके पैसे से राजधानी के एयरपोर्ट और चौक-चौराहे रौनक में हैं, जबकि गांव खुद विकास से वंचित है।  

उद्योगों पर शोषण का आरोप

राकेश यादव ने कहा कि जिन उद्योगों के योगदान से थाना, तहसील और शासकीय कार्यालयों में नेम प्लेट अंकित हैं, उन उद्योगों का गांव ही विकास के लिए तरस रहा है। वहां के ग्रामीण अब अपने पुरखों की वजूद और विकास के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि गांव का दुर्भाग्य है कि जितने जनप्रतिनिधियों को इस गांव ने दिया, वे उद्योगपतियों की मोटी रकम और ठेकेदारी के नीचे दब गए। गांव में श्मशान घाट पर पानी का एक बूंद नहीं है, सड़कें डस्ट से भरी हुई हैं, न अच्छा स्कूल है, न स्वास्थ्य सुविधा और न ही रोजगार। जो रोजगार हैं, उन पर इन्हीं उद्योगों के कारण आए बाहरी लोगों का कब्जा हो गया है।

जबरन अधिग्रहण और प्रशासन की मिलीभगत

यादव ने यह भी बताया कि जब सरकार ने स्थानीय लोगों की जमीन जबरदस्ती अधिग्रहित की, तो ग्रामीणों ने उद्योगपतियों के झांसे में आकर उसे बेच दिया। आज सिलतरा सहित आसपास के गांवों के चारागाह, खेल के मैदान, तालाब और खार सभी उद्योगपतियों के कब्जे में हैं। इसमें प्रशासन और राजधानी में बैठे बड़े-बड़े नेताओं का पूरा साथ मिला, जिससे गांव वालों का दोहन और शोषण हुआ। उन्होंने कहा कि आज सिलतरा के युवा और जनता जाग चुकी है और अपने अधिकार की लड़ाई शुरू कर दी है, लेकिन यह रास्ता आसान नहीं है। पूंजीवाद से लड़ाई में अपने ही लोग और प्रशासन-शासन से पहले लड़ना पड़ता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आज इस आजाद देश में सिलतरा के ग्रामीण उद्योगों के बीच गुलाम हैं। राकेश यादव ने ग्रामीणों के हक और न्याय की इस लड़ाई में सदैव साथ होने की बात दोहराई। उन्होंने स्थानीय विद्यालय सांसद से निवेदन किया है कि सीजीपीडीसीएल और उद्योगों से बात कर इस अवैध कार्य पर रोक लगाएं और टावर को किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने का निर्देश दें।
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