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मुख्यमंत्री का बस्तरिया अंदाज में स्वागत

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OM Darpan

Nov 19, 2024 08:07 am 208 views
मुख्यमंत्री का बस्तरिया अंदाज में स्वागत
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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के आज बस्तर क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण की बैठक में शामिल होने के लिए चित्रकोट पहुंचने पर बस्तरिया अंदाज में जोरदार स्वागत हुआ। इस अवसर पर जनजातीय लोक नर्तक दलों ने आकर्षक प्रस्तुति दी, जबकि जनप्रतिनिधियों ने पारंपरिक गौर सिंग मुकुट पहनाकर मुख्यमंत्री का अभिनन्दन किया। प्रसिद्ध पर्यटन स्थल चित्रकोट में बस्तर क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण की बैठक के आयोजन हेतु विशेष तैयारियां की गई थीं। मुख्यमंत्री ने बस्तर हाट की थीम पर आधारित एक्सपीरियंस जोन एवं विभिन्न विभागीय स्टालों का अवलोकन किया। इस दौरान बस्तर संभाग के सात जिलों- बस्तर, कोण्डागांव, दंतेवाड़ा, कांकेर, नारायणपुर, सुकमा और बीजापुर की विकास योजनाओं और उपलब्धियों को स्टॉलों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया। इन स्टालों में विकास और नवाचार की झलक दिखी। बस्तर कॉफी का सफर बस्तर जिले के स्टाल में 'बस्तर कॉफी' की प्रक्रिया और उसके प्रसार को रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया। प्रदर्शनी में कॉफी उत्पादन, ताजा चेरी से लेकर कॉफी की धुलाई, भुनाई, पिसाई और पाउडर पैकेजिंग तक की पूरी प्रक्रिया को प्रदर्शित किया गया। 'बस्तर कैफे' की पहल से स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया गया है, और बस्तर कॉफी ब्रांड को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाने का प्रयास जारी है। कला और नवाचार का संगम कोण्डागांव जिले ने स्टाल के माध्यम से अपनी पारंपरिक शिल्पकला और आधुनिक विकास परियोजनाओं को सामने रखा। झिटकू मिटकी आर्टिसन प्रोड्यूसर ने बेल मेटल कला से अयोध्या के श्री राम मंदिर का स्थापत्य प्रदर्शित किया। इसके साथ ही गारमेंट फैक्ट्री, एनीमिया मुक्त कोण्डागांव अभियान और 'मावा कोण्डानार' मोबाइल ऐप के जरिए नागरिक सुविधाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी गई। शिक्षा और बाल विकास में नवाचार दंतेवाड़ा जिले ने शिक्षा और बाल कल्याण के क्षेत्र में किए गए नवाचारों को साझा किया। बाल मित्र कार्यक्रम के तहत स्कूल से बाहर और अप्रवेशी बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने की पहल की गई है। बाल मित्र पुस्तकालय एवं पंचायत के जरिए बच्चों को नेतृत्व और निर्णय लेने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। लघु वनोपज से बढ़ती आजीविका कांकेर जिले में लघु वनोपज आधारित परियोजनाओं और उद्यानिकी विकास को प्राथमिकता दी जा रही है। फ्रेश सीताफल परियोजना स्थानीय किसानों और स्वसहायता समूह की दीदियों के लिए आय का प्रमुख स्रोत बनी है। लघु धान के मछली पालन और कड़कनाथ मुर्गी पालन के माध्यम से रोजगार के नए अवसर और आजीविका संवर्धन की जानकारी दी गई। महिला सशक्तिकरण का उदाहरण नारायणपुर जिले में महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रयास किए गए हैं। स्वसहायता समूह की दीदियों ने हर्बल गुलाल, मशरूम उत्पादन, कड़कनाथ और बटेर पालन जैसी गतिविधियों में भागीदारी बढ़ाई है। इन गतिविधियों से महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता मिली है। यातायात और आवासीय योजनाओं की प्रगति सुकमा जिले के स्टाल में आधारभूत संरचना और ग्रामीण विकास पर जोर दिया गया है। हक्कुम मेल अंतर्गत यातायात सुविधा को बेहतर बनाने के कार्य, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवासीय परियोजनाओं और महिला स्वसहायता समूहों के आर्थिक सशक्तिकरण के प्रयास प्रदर्शित किए गए। 'नियद नेल्ला नार' योजना के सकारात्मक परिणाम बीजापुर जिले में प्रदेश सरकार द्वारा माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में संचालित 'नियद नेल्ला नार' योजना के माध्यम से समग्र विकास पर ध्यान केंद्रित किया गया है। ग्रामीणों के लिए बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, रोजगार के नए अवसर और जिले के प्राकृतिक सौंदर्य को पर्यटन के माध्यम से बढ़ावा देने के प्रयासों की जानकारी दी गई।  
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