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फर्जीवाड़े के बाद निलंबन, लेकिन कार्रवाई की धीमी गति से प्रशासनिक साख पर लगा प्रश्नचिह्न
महासमुंद (सत्यानंद सोई)।
महासमुंद जिले के पिथौरा विकासखंड में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत एक गंभीर फर्जीवाड़ा सामने आया है। पंचायत सचिव चैतराम साहू, जो अब निलंबित हैं, ने अपने गृह ग्राम बडेटेमरी में योजना के मापदंडों के विपरीत अपने ही नाम से आवास स्वीकृति कराई। यह खुलासा तब हुआ जब सत्यापन के दौरान मालूम पड़ा कि साहू योजना के नियमों के अनुसार पूरी तरह अपात्र हैं। इसके बावजूद, उन्होंने अधिकारियों के साथ सांठगांठ करके इस योजना का लाभ उठा लिया
निलंबन के बावजूद कार्रवाई का अभाव
इस मामले की जानकारी पाते ही चैतराम साहू को जिला सीईओ महासमुंद ने 1 दिसंबर 2023 को निलंबित कर दिया। लेकिन इस फैसले के बाद भी पिथौरा विकासखंड के समन्वयक और जिम्मेदार अधिकारियों पर किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं की गई। जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध निष्क्रियता को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि कार्रवाई केवल औपचारिकता मात्र है
गायब दस्तावेज: एक नई चुनौती
आरटीआई के तहत प्रदान की गई जानकारी से पता चला है कि जनपद पंचायत पिथौरा के दस्तावेज गायब हैं। रूपानंद सोई को जानकारी देते हुए कार्यालय ने बताया कि जमा किया गया पंजीयन प्रपत्र गायब है। तीन अधिकारियों—डी.एल. बरिहा, तेजेन्द्र साहू, और ऋषिकांत साहू ने परिवारों को इसे खोजने का प्रयास किया, मगर दस्तावेजों का न मिलना अधिकारियों की कार्रवाई में ईमानदारी के अभाव को दर्शाता है
सचिव के दावे और उसकी वास्तविकता
2 नवंबर 2023 को चैतराम साहू ने जनपद सीईओ पिथौरा के समक्ष लिखित में जवाब देकर दावा किया कि यह त्रुटिवश हो गया है और प्राप्त राशि का इस्तेमाल नहीं किया गया। जबकि जांच ने दर्शाया कि सचिव और उनकी पत्नी कल्याणी साहू ने दूसरे के आवास पर खड़े होकर जियो टैगिंग किया। जो बैंक खाता दिखाया वह उनके ही था, जिसमें 65 हजार रुपये आ चुके थे.











