अंबिकापुर नगर निगम में वेतन का संकट: पार्षद और कर्मचारी हुए हताश
OM Darpan
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आर्थिक स्थिति और राजनीतिक उठापटक का मिला-जुला असर
अम्बिकापुर (पंकज शुक्ला)।
छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर नगर निगम, जो राज्य के सबसे बड़े नगर निगमों में गिना जाता है, पिछले डेढ़ साल से वित्तीय संकट से जूझ रहा है। निगम के 48 निर्वाचित पार्षदों को मानदेय नहीं मिलने की स्थिति गंभीर होती जा रही है। वहीं, कर्मचारियों की सैलरी भी समय पर नहीं मिल रही, जिससे वेतन संकट गहरा गया है।
अर्थव्यवस्था की दुर्दशा:
नगर निगम की आर्थिक स्थिति इतनी खराब है कि अप्रैल 2024 से पहले की वार्षिक आय प्रति माह 40 से 50 लाख रुपए है, जबकि खर्च एक करोड़ से अधिक हो रहा है। इससे निगम की आमदनी और खर्च में भारी असमानता उत्पन्न हो गई है। पार्षदों का आरोप है कि इस संकट के लिए निगम का प्रशासन जिम्मेदार है।
राजनीतिक अस्थिरता का प्रभाव:
कांग्रेस के दस वर्षों के राज को देखते हुए, यहां के पार्षदों में रोष व्याप्त है। पिछले कुछ वर्षों में बीजेपी के शासन में आने के बावजूद, स्थिति में सुधार नहीं हुआ है। पूर्व विधायक टीएस सिंह देव और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बीच सत्ता संघर्ष के कारण निगम को अपेक्षित राशि नहीं मिल पाई।
स्थानीय नेताओं की प्रतिक्रिया:
बीजेपी पार्षद आलोक दुबे ने कहा कि यह स्थिति कांग्रेस के कार्यकाल का परिणाम है। उन्होंने कहा, “पार्षदों को मानदेय न मिलना चिंता का विषय है।” दुबे का विश्वास है कि नगरीय निकाय विभाग जल्द ही इस समस्या का समाधान करेगा।
नगर निगम के आयुक्त ने कहा
“हम अपने कर्मचारियों का वेतन देने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि पार्षदों का मानदेय एक साल से लंबित है, लेकिन इसके लिए शासन स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।”
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