स्ट्रोक से जान तो बच गई, लेकिन आगे क्या? लाखों का रिहैब खर्च, पर बीमा कंपनियां झाड़ रहीं पल्ला!
मुंबई। भारत में स्ट्रोक (पक्षाघात) अब केवल एक अचानक आने वाली मेडिकल इमरजेंसी नहीं रह गया है, बल्कि यह एक लंबी और चुनौतीपूर्ण बीमारी का रूप ले चुका है। समय पर इलाज मिलने से मरीजों की जान तो बच रही है, लेकिन असली संघर्ष अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद शुरू होता है। स्ट्रोक के … Read more