नई दिल्ली।
विपक्षी INDI अलायंस में ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) को लेकर आपसी मतभेद और बढ़ गए हैं। कांग्रेस पार्टी ने एक बार फिर ईवीएम में गड़बड़ी का मुद्दा उठाया है, और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा था कि वे इसे लेकर आंदोलन करेंगे। उनका कहना था, “हम भारत जोड़ो आंदोलन की तर्ज पर बैलेट पेपर से चुनाव के लिए यात्रा निकालेंगे।”
इस बयान के बाद, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने ईवीएम पर उठाए गए सवालों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “ऐसा नहीं हो सकता कि जब आप चुनाव जीतें तो परिणाम स्वीकार कर लें और जब हार जाएं तो ईवीएम पर दोष मढ़ दें। जब ईवीएम के इस्तेमाल से आपके सौ से अधिक सदस्य संसद में पहुंच जाते हैं, तब आप अपनी पार्टी की जीत का जश्न मनाते हैं, लेकिन कुछ महीनों बाद, अगर चुनाव परिणाम आपके मन के मुताबिक न हों, तो आप ईवीएम को दोष देने लगते हैं।”
उमर अब्दुल्ला की इस टिप्पणी पर कांग्रेस भड़क गई है। कांग्रेस ने उन पर सत्ता बदलने के बाद रुख बदलने का आरोप लगाया है। लोकसभा में कांग्रेस के सचेतक राजीव टैगोर ने उमर अब्दुल्ला के इस रवैये पर सवाल उठाया है। टैगोर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अब्दुल्ला का वीडियो पोस्ट करते हुए कहा, “मुख्यमंत्री बनने के बाद अपने सहयोगियों के प्रति ऐसा रवैया क्यों?” टैगोर ने आगे कहा कि समाजवादी पार्टी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) और शिवसेना ने भी ईवीएम के खिलाफ आवाज उठाई थी।
इसके अलावा, महाराष्ट्र में विपक्षी दलों ने आज फिर से ईवीएम हटाने को लेकर आंदोलन किया। विपक्षी नेताओं ने महाराष्ट्र विधान भवन की सीढ़ियों पर प्रदर्शन किया और ईवीएम के इस्तेमाल के विरोध में नारे लगाए। यह प्रदर्शन नागपुर में राज्य विधानमंडल के शीतकालीन सत्र के पहले दिन आयोजित किया गया। महाराष्ट्र में विपक्षी महा विकास आघाड़ी (MVA) के नेता अंबादास दानवे ने इस प्रदर्शन का नेतृत्व किया। उन्होंने संविधान और लोकतंत्र को बचाने का आह्वान करते हुए ईवीएम के खिलाफ विरोध जताया।










