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बालोद जिले के झलमला और सिवनी गांव की महिलाओं ने ई-रिक्शा योजना से शुरू किया अपना कारोबार, हर महीने हो रही है शानदार कमाई।
✍️ डिजिटल डेस्क
बालोद | छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन में श्रम विभाग की दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण का बड़ा माध्यम बन रही है। बालोद जिले के ग्राम झलमला की सेवती ठाकुर और ग्राम सिवनी की अंजू नेताम इस योजना की मदद से आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रही हैं। इन महिलाओं ने ई-रिक्शा को अपनी आय का जरिया बनाकर न केवल अपने परिवार की स्थिति सुधारी है, बल्कि समाज के लिए प्रेरणा भी बन गई हैं।
*** कैंटीन के काम में मिली बड़ी राहत ***
ग्राम झलमला निवासी सेवती ठाकुर श्रम विभाग में पंजीकृत हैं और एक स्व-सहायता समूह के जरिए कैंटीन चलाती हैं। पहले कैंटीन के लिए बाजार से सामग्री लाने में उन्हें भारी किराया खर्च करना पड़ता था। योजना के तहत आर्थिक अनुदान और बैंक ऋण के माध्यम से उन्होंने ई-रिक्शा खरीदा। अब वे खुद सामान की ढुलाई कर रही हैं, जिससे प्रतिदिन के किराये की बचत हो रही है और समूह के मुनाफे में भी वृद्धि हुई है। इस सहयोग के लिए उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है।
*** गृहिणी से बनीं सफल स्वरोजगारी ***
वहीं ग्राम सिवनी की अंजू नेताम जो पहले एक साधारण गृहिणी थीं, अब ई-रिक्शा चलाकर स्वरोजगार कर रही हैं। वे गांव के स्कूली बच्चों को घर से स्कूल पहुंचाने और स्थानीय परिवहन सेवाएं देने का काम करती हैं। इस व्यवसाय से उन्हें हर महीने 10 से 12 हजार रुपए की शुद्ध आमदनी हो रही है। अंजू ने बताया कि उन्हें महतारी वंदन योजना का भी नियमित लाभ मिल रहा है, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा है और वे अब अपने परिवार की आर्थिक धुरी बन गई हैं।








