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काकोरी कांड के 100 वर्ष: केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने दी क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलि

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“काकोरी कांड युवाओं को सदैव प्रेरित करेगा,” शेखावत ने कांस्टीट्यूशन क्लब में काकोरी प्रतिरोध शताब्दी वर्ष समारोह को किया संबोधित।

नई दिल्ली। काकोरी कांड के 100 वर्ष पूरे होने पर केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि यह क्रांतिकारी घटना युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी। शेखावत नई दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में सभ्यता अध्ययन केंद्र द्वारा आयोजित “काकोरी प्रतिरोध शताब्दी वर्ष समारोह” को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भारतीय स्वाधीनता संग्राम के दौरान 9 अगस्त 1925 को लखनऊ के निकट काकोरी में हुए इस साहसिक कृत्य को इतिहास में जानबूझकर दबाने के प्रयास किए गए, लेकिन यह घटना हमेशा देशवासियों के दिलों में जिंदा रहेगी।

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शेखावत ने इस ऐतिहासिक घटना के बारे में बताते हुए कहा कि क्रांतिकारी राम प्रसाद बिस्मिल, अशफ़ाकउल्ला खान, राजेंद्र लाहिड़ी, चंद्रशेखर आज़ाद, शचींद्रनाथ सान्याल और ठाकुर रोशन सिंह ने मिलकर सहारनपुर से लखनऊ जा रही रेलगाड़ी में काकोरी के पास अंग्रेजी सरकार का खजाना लूटकर ब्रिटिश साम्राज्य को आर्थिक नुकसान पहुँचाया था। इस घटना के बाद, अंग्रेजी सरकार ने क्रांतिकारियों को गिरफ्तार किया, जिसमें 40 लोगों को हिरासत में लिया गया और चार वीरों—राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाकउल्ला खान, राजेंद्र लाहिड़ी, और ठाकुर रोशन सिंह—को फांसी की सजा दी गई।

इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ ने भी अपने विचार व्यक्त किए। पूर्व केंद्रीय मंत्री और सेवानिवृत्त IPS अधिकारी डॉ. सतपाल मलिक भी इस आयोजन में उपस्थित थे। मुख्य वक्ता डॉ. आनंदवर्धन, जो डॉ. बी आर अंबेडकर विश्वविद्यालय, दिल्ली से जुड़े हैं, ने इस मौके पर कहा कि काकोरी प्रतिरोध ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में एक महत्वपूर्ण स्थान हासिल किया है। सभ्यता अध्ययन केंद्र के निदेशक रविशंकर ने क्रांतिकारियों के बलिदान को याद करते हुए कहा कि इस वर्षभर कई कार्यक्रमों के माध्यम से काकोरी प्रतिरोध की गाथा को देशभर में फैलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह घटना केवल एक कांड नहीं बल्कि एक संगठित प्रतिरोध था।

 

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