- नई दिल्ली से राजघाट कार्यालय से ऑनलाइन सब्सिडी जारी
नई दिल्ली।
खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) ने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के तहत देशभर के 11,480 सेवा क्षेत्र के लाभार्थियों को करीब 300 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी सब्सिडी वितरित की। यह वितरण 17 जून 2025 को केवीआईसी के अध्यक्ष मनोज कुमार द्वारा नई दिल्ली स्थित राजघाट कार्यालय से ऑनलाइन माध्यम से किया गया।

केवीआईसी अध्यक्ष मनोज कुमार ने इस अवसर पर कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पीएमईजीपी योजना ने गांव-गांव तक रोजगार और आत्मनिर्भरता का आधार मजबूत किया है।” इस आयोजन में केवीआईसी की मुख्य कार्यकारी अधिकारी रूप राशि व अन्य वरिष्ठ अधिकारी मुंबई से वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए।
छह अंचलों में व्यापक संवितरण
इस वृहद कार्यक्रम में देश के सभी छह अंचलों की सक्रिय भागीदारी रही:
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केंद्रीय जोन: उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड – 2403 परियोजनाओं को 72 करोड़ रुपये की सब्सिडी, 218 करोड़ रुपये का ऋण स्वीकृत।
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पूर्वी जोन: बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल व अंडमान-निकोबार – 996 परियोजनाएं, 22 करोड़ रुपये की सब्सिडी, 71 करोड़ रुपये का ऋण।
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उत्तर जोन: पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, राजस्थान और चंडीगढ़ – 2713 परियोजनाएं, 61 करोड़ रुपये की सब्सिडी, 184 करोड़ रुपये का ऋण।
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पूर्वोत्तर जोन: असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा – 81 परियोजनाएं, 2 करोड़ रुपये की सब्सिडी।
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दक्षिण जोन: आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी – 4565 परियोजनाएं, 116 करोड़ रुपये की सब्सिडी, 343 करोड़ रुपये से अधिक का ऋण।
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पश्चिम जोन: महाराष्ट्र, गुजरात और गोवा – 722 परियोजनाएं, 26 करोड़ रुपये की सब्सिडी, 82 करोड़ रुपये का ऋण।
पीएमईजीपी योजना जब से शुरू हुई है, तब से अब तक कुल 10,18,185 सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना हो चुकी है। इसके तहत भारत सरकार ने 73,348 करोड़ रुपये का ऋण स्वीकृत किया है और लाभार्थियों को 27,166 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी सब्सिडी दी गई है। इस योजना ने 90,04,541 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से रोजगार प्रदान किया है।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में ठोस कदम
इस कार्यक्रम ने स्वरोजगार को नई दिशा दी है और प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार किया है। यह योजना न केवल आर्थिक सहायता देती है, बल्कि यह एक सामाजिक आंदोलन भी बन चुकी है जो युवाओं, महिलाओं और कारीगरों को उद्यमिता की ओर अग्रसर कर रही है।









