नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पहाड़ियों की परिभाषा और उनके संरक्षण से जुड़े मामले में उच्चाधिकार प्राप्त समिति को अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए छह महीने का अतिरिक्त समय देने से इनकार कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने समिति को दिन-रात काम कर 30 नवंबर 2026 तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि इसके बाद किसी और विस्तार का अनुरोध स्वीकार नहीं किया जाएगा।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल थे। सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को बताया कि समिति ने अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करने के लिए छह महीने का अतिरिक्त समय मांगा है। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने नाराजगी जताते हुए कहा कि समिति को फरवरी 2027 तक समय मांगने के बजाय दिन-रात काम करना चाहिए।
अदालत ने निर्देश दिया कि समिति दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करे। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यदि समिति ऐसा करने में सक्षम नहीं है तो अदालत को बताया जाए, ताकि समिति का पुनर्गठन किया जा सके। उन्होंने रिपोर्ट में देरी को लेकर असहमति जाहिर करते हुए कहा कि फरवरी 2027 तक समय बढ़ाने का अनुरोध स्वीकार नहीं किया जा सकता।
काम नहीं हुआ तो बदल देंगे समिति
मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि समिति को छह महीने का समय मांगने के बजाय अदालत से यह अनुरोध करना चाहिए था कि रिपोर्ट उनके सेवानिवृत्त होने के बाद प्रस्तुत की जाए। सुनवाई के दौरान एक अधिवक्ता ने कहा कि समिति को अंतरिम रिपोर्ट के बजाय अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करनी चाहिए। इस पर पीठ ने कहा कि अंतरिम रिपोर्ट भी पर्याप्त होगी और अदालत उसका परीक्षण करेगी, लेकिन विस्तार मांगना उचित नहीं है।
एक अन्य अधिवक्ता ने पीठ को बताया कि समिति ने उनके मुवक्किल की बात नहीं सुनी है। इस पर पीठ ने कहा कि उसने सभी हितधारकों की सुनवाई के संबंध में पहले ही आदेश पारित किया है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि सभी के हित में यही होगा कि समिति जल्द रिपोर्ट दे, ताकि अनुमति योग्य गतिविधियों को शुरू किया जा सके और अवैध कार्यों पर रोक लग सके।
अंतरिम रिपोर्ट भी होगी स्वीकार
अदालत ने समिति को सलाह दी कि वह इस बीच प्रमुख मुद्दों को अलग करके एक अंतरिम रिपोर्ट भी प्रस्तुत कर सकती है। इससे अदालत को उन मुद्दों के समाधान में मदद मिलेगी, जिन पर अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर निर्णय लिया जा सकता है। समिति ने पहले 31 अगस्त को दाखिल अनुपालन पत्र में स्थानिक, पारिस्थितिक और भूवैज्ञानिक साक्ष्यों को एकीकृत करने के लिए 28 फरवरी 2027 तक का समय मांगा था।
दिसंबर में होगी अगली सुनवाई
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई दिसंबर के पहले सप्ताह में निर्धारित की है। सुप्रीम कोर्ट ने इस साल मई में उच्चाधिकार प्राप्त समिति का गठन किया था, जो अरावली की परिभाषा और सीमांकन से संबंधित केंद्र सरकार की रिपोर्ट की स्वतंत्र समीक्षा कर रही है। अब समिति को हर हाल में 30 नवंबर तक अपनी रिपोर्ट दाखिल करनी होगी।









