
बारिश का कहर, प्रकृति विकराल रूप में।
बैलाडीला/ कौशल संदुजा
बैलाडीला, जो अपने सर्वोच्च लोह अयस्क के लिए पूरे देश में विख्यात है, आज बाढ़ की चपेट में है। यहां की पहाड़ियों में प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ खनिज भी भरपूर मात्रा में मौजूद हैं। कभी आसमान को चूमती बैलाडीला की शिखरें, जो अपने बैल की डील जैसी पर्वत श्रृंखला के लिए पहचानी जाती थीं, आज बाढ़ से त्रस्त हो चुकी हैं। एनएमडीसी परियोजना 1960 के दशक से इस क्षेत्र में खनन कर रही है, जो देश की औद्योगिक मांग को पूरा करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का भी ध्यान रखती आई है।
पिछले कुछ दिनों से हो रही लगातार बारिश अब कहर बनकर बाढ़ के रूप में फट पड़ी है। बैलाडीला में भारी बारिश और तेज हवाओं ने विकराल रूप धारण कर लिया है, जिससे क्षेत्र में ठिठुरती ठंड भी फैल गई है। लोह अयस्क की पहाड़ियों में जमा बारिश का पानी अत्यधिक वेग से बहते हुए पहाड़ी ढलानों से नीचे आ गया, जो भी उसके रास्ते में आया उसे तबाह करता चला गया। घरेलू सामान और बड़ी-छोटी गाड़ियाँ इस जलप्रवाह में बह गईं। मलबा, बोल्डर, पत्थरों का अंबार, ढही दीवारें और उड़ चुकी छतें, शौचालय सभी बर्बाद हो गए। कई लोग पानी के तेज बहाव में बह गए और कुछ मवेशियों के भी गुम होने की ख़बर है। हर जगह चीख-पुकार और भय का माहौल है।
अत्यधिक प्रभावित क्षेत्र में राय कैम्प से लेकर बंगाली कैंप वार्ड नं 3 और भरतपुर कैंप शामिल हैं, तथा इनसे लगे इलाके भी बहुत क्षतिग्रस्त हुए हैं। कभी इतनी बड़ी आपदा मध्य शहर में नहीं घटी थी। प्रभावित क्षेत्रों में लोग अपने सामान संजोह रहे हैं, गीले कपड़ों में बच्चे अपनी किताबें खोज रहे हैं, राशन, गैस सिलेंडर, फर्नीचर और घरेलू सामान सभी बह गए हैं। पीड़ित अपने सामान और मलबा कीचड़ साफ करते हुए दिख रहे हैं। एनएमडीसी किरंदुल और नगरीय प्रशासन द्वारा सड़कों की सफाई और सुधार का काम किया जा रहा है।
आक्रोशित, बेसहारा, परेशान और जरूरतमंद लोगों को तहसीलदार और एसडीएम आश्वस्त करते दिख रहे हैं। एनएमडीसी परियोजना ने पेलोडर और लोडर को सड़कों पर उतार कर घंटों प्रभावित सड़क से मलबा हटाकर मार्ग को दुरुस्त किया और रात्री भोज तथा ठहरने की व्यवस्था की।
प्रशासन और प्रबंधन से सवाल:
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यह आपदा है या लापरवाही?
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इस हानि के लिए जिम्मेदार कौन है?
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वर्षा ऋतु में प्रशासन कितना मुस्तैद है?
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कितने चैक डेम का निर्माण और सफाई किया गया है?
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मृदा संरक्षण और पौधारोपण के लिए कितनी सजगता बरती गई है?
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