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आक्रामक बंदर का रेस्क्यू कर वन विभाग ने सुरक्षित क्षेत्र में छोड़ा

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कवर्धा (जलेश कुमार साहू)।

वन परिक्षेत्र पंडरिया पश्चिम के अंतर्गत ग्राम पांडातराई में एक आक्रामक बंदर द्वारा ग्रामीणों पर हमले की सूचना प्राप्त होने पर वन विभाग की टीम ने तुरंत कार्यवाही की। प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) छत्तीसगढ़, रायपुर एवं मुख्य वन संरक्षक दुर्ग वृत्त, दुर्ग से प्राप्त निर्देशों के तहत वनमंडलाधिकारी कवर्धा श्री निखिल अग्रवाल के निर्देशन में, उपवनमंडलाधिकारी पंडरिया श्री सुयश धर दीवान के मार्गदर्शन एवं वन परिक्षेत्र अधिकारी पंडरिया पश्चिम श्रीमती पल्लवी गंगबेर के कुशल नेतृत्व में बंदर को सुरक्षित रूप से रेस्क्यू किया गया।

आक्रामक बंदर की घातक हरकतें

कई दिनों से आक्रामक हो चुके इस बंदर ने ग्रामीणों पर हमले किए थे, जिनमें एक महिला गंभीर रूप से घायल हो गई थी। वहीं, इसी बीच बंदर को उसके साथी बंदरों द्वारा भी घायल कर दिया गया था।

विशेष रूप से बुलाए गए डॉक्टर ने किया उपचार

बंदर की सुरक्षा और उसे किसी तरह के नुकसान से बचाने के दृष्टिकोण से, बिलासपुर से वेटनरी डॉक्टर श्री चंदन को रेस्क्यू टीम में शामिल किया गया। डॉक्टर चंदन और वन विभाग की टीम ने मिलकर बंदर को रेस्क्यू किया। डॉक्टर ने बंदर का प्रारंभिक उपचार किया, और उपचार के बाद उसे पूरी तरह से स्वस्थ पाया गया। इसके बाद, डॉक्टर चंदन ने उसे फिटनेस प्रमाणपत्र भी प्रदान किया।

बंदर को अभ्यारण्य में छोड़ा गया

चिकित्सकीय उपचार और फिटनेस प्रमाणपत्र के बाद, बंदर को भोरमदेव अभ्यारण्य में उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया, ताकि वह वहां सुरक्षित रूप से रह सके।

इस महत्वपूर्ण रेस्क्यू कार्यवाही में वन विभाग के कई अधिकारियों और कर्मचारियों ने अहम भूमिका निभाई। इसमें श्रीमती शिखा झा (स.व.सं. प्रशिक्षु), पंडरिया पश्चिम में पदस्थ संतोष नेताम, शिवकुमारी जोशी, सुनील सोनी, रामकुमार दीक्षित, विनोद भास्कर, अजीत पाल, जितेन्द चंद्राकार, विष्णु धुर्वे, मनोज कुमार, बुनिफस इक्का और रवि मरकाम का विशेष योगदान रहा।

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