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निरंकारी राजपिता जी का प्रेमा भक्ति पर दिव्य उपदेश: “सच्चा प्रेम ही ईश्वर प्राप्ति का एकमात्र मार्ग “

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रायपुर।

निरंकारी राजपिता जी ने आज कृषि उपज मंडी के विशाल प्रांगण में उपस्थित मानव समाज को प्रेमा भक्ति का गहन उपदेश दिया। उन्होंने फरमाया कि प्रेमा भक्ति में प्रेम केवल शब्दों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह भक्तों के जीवन से स्वयं प्रकट होता है। यह एक ऐसी अवस्था है जहाँ प्रेम ही सर्वोपरि होता है।

प्रेम का सच्चा स्वरूप

राजपिता जी ने निरंकारी माता सविन्दर जी के जीवन का उदाहरण देते हुए समझाया कि “भक्ति का ये उसूल है के तू कुबूल तो तेरा किया सब कुबूल है”। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईश्वरीय प्रेम केवल एक क्रिया नहीं, बल्कि स्वयं को प्रेम के रंग में रंग लेना है। जहाँ सच्चा प्रेम होता है, वहाँ केवल प्रीतम (ईश्वर/गुरु) की ही बात होती है। यह सौदा अक्ल (बुद्धि) का नहीं, क्योंकि बुद्धि इस प्रेम को समझ नहीं पाती है। राजपिता जी ने मीरा, शबरी और कबीर जैसे अनेक भक्तों का जिक्र किया, जिन्हें उन्होंने भक्ति के उत्तम उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि एक गुरसीख का रिश्ता गुरु से केवल प्रेम वाला ही होता है, जहाँ प्रेम के सिवा कुछ बचता ही नहीं।

लैला-मजनू का उदाहरण और गुरु-शिष्य का प्रेम

राजपिता जी ने लैला-मजनू का उदाहरण देते हुए प्रेम की गहराई को समझाया। उन्होंने बताया कि जिस प्रकार मजनू लैला का नाम लेता हुआ उसे सेहराओं में ढूंढता रहता था और दीवानों की तरह उसे पुकारता रहता था, और जब राजा ने उसे किसी भी सुंदर स्त्री से विवाह करने का प्रस्ताव दिया तो उसने पूछा कि वो स्त्री लैला तो नहीं होगी यह दिखाता है कि उसकी निगाह केवल लैला के लिए थी। इसी प्रकार, जिस भक्त की अवस्था ऐसी होती है, उसका प्रेम अपने गुरु से भी ऐसा ही होता है।

परहित ही सच्ची भक्ति का आधार

उन्होंने यह भी बताया कि भक्त का हृदय तो “परहित सरस धरम नहीं भाई” (दूसरों का भला करने से बढ़कर कोई धर्म नहीं) वाली अवस्था का होता है। यदि अवस्था “पर पीड़ा सम नहीं अधमाई” (दूसरों को पीड़ा पहुँचाने से बढ़कर कोई अधर्म नहीं) वाली है, तो फिर जीवन में भक्ति की अवस्था प्रेमा भक्ति वाली नहीं हो सकती। आज संसार में ईश्वर का नाम केवल सांसारिक सुखों की प्राप्ति के लिए लिया जा रहा है, प्रभु की प्राप्ति के लिए नहीं। यदि मनुष्य जीवन के मुख्य उद्देश्य को प्राप्त नहीं करता है, तो वह वंचित ही रह जाएगा।

संत समागम का सफल आयोजन

राजपिता जी ने कहा कि सतगुरु अपनी लीला से अपने भक्तों को निहाल करते रहते हैं। आज के इस संत समागम में दुबई और बेंगलुरु जैसे दूर-दराज के स्थानों से भी भक्तों ने आकर दिव्य दर्शन किए। क्षेत्र के जोनल इंचार्ज गुरबक्श सिंह कालरा ने समस्त उपस्थित प्रभु प्रेमियों का धन्यवाद किया। उन्होंने पुलिस विभाग, यातायात पुलिस, नगर निगम, बिजली विभाग, जल विभाग द्वारा कार्यक्रम में दिए गए योगदान के लिए उनका हृदय से आभार व्यक्त किया। साथ ही, उन्होंने कृषि उपज मंडी के अधिकारियों को इस स्थान के उपयोग के लिए धन्यवाद भी दिया।

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