रायपुर/दुर्ग।
प्रदेश के महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय (MGUHF) में प्रशासनिक व्यवस्था मजाक बनकर रह गई है। विश्वविद्यालय में ‘एक कुर्सी और दो दावेदार’ की स्थिति उत्पन्न हो गई है। यहाँ एक ही समय में दो कुलसचिव (Registrar) के कार्यरत होने के मुद्दे पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने शुक्रवार को जोरदार हंगामा किया।
परिषद के कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय में व्याप्त प्रशासनिक अव्यवस्थाओं के खिलाफ आंदोलन करते हुए कुलपति से पांच बिंदुओं पर स्पष्ट जवाब मांगा है। विवाद तब गहरा गया जब यह आरोप लगा कि नवपदस्थ किए गए आर.एल. खरे ने आधिकारिक ईमेल आईडी का उपयोग कर खुद के पदभार ग्रहण करने की सूचना जारी कर दी, जबकि शासन द्वारा नियुक्त कुलसचिव यशवंत केराम को हटाने का कोई विधिवत आदेश जारी ही नहीं हुआ है।
नेमप्लेट विवाद: केबिन पर कब्जे का आरोप
एबीवीपी ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि आर.एल. खरे द्वारा वर्तमान कुलसचिव यशवंत केराम के केबिन पर कथित तौर पर जबरदस्ती कब्जा किया गया। वहां से केराम का नाम-पट्ट (Nameplate) हटाकर आर.एल. खरे ने अपनी नेमप्लेट लगा दी।
इस बात से आक्रोशित विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने मौके पर पहुंचकर आर.एल. खरे की नेमप्लेट हटवाई और यशवंत केराम को ससम्मान उनके मूल केबिन में पुनः स्थापित करवाया।
कुलपति से पूछे ये 5 सुलगाते सवाल
आंदोलन के दौरान एबीवीपी ने कुलपति के समक्ष पांच सीधे प्रश्न रखे हैं, जिनका जवाब प्रबंधन को देना होगा:
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जब विधिवत कुलसचिव पदस्थ हैं, तो आर.एल. खरे ने ‘रजिस्ट्रार’ की आधिकारिक ई-मेल आईडी का उपयोग कैसे किया?
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किस कर्मचारी ने नेमप्लेट बदलकर कार्यालय में यह परिवर्तन किया?
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विश्वविद्यालय स्पष्ट करे कि वर्तमान में वैध कुलसचिव कौन है? किसके हस्ताक्षर और आदेश मान्य होंगे?
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कुलपति ने अब तक राजभवन या छत्तीसगढ़ शासन से इस असमंजस की स्थिति पर स्पष्ट दिशा-निर्देश (Guidance) क्यों नहीं मांगे?
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कुलसचिव यशवंत केराम को हटाने का कोई आधिकारिक आदेश नहीं है, तो उन्हें उनके कार्यालय से किस आधार पर बेदखल किया गया?
विवाद की जड़ आदेशों में स्पष्टता की कमी है। एबीवीपी के मुताबिक:
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राजभवन ने 23/12/2024 को रामलखन खरे (आर.एल. खरे) को उनके मूल पद पर प्रतिस्थापित किया था।
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इसके बाद छत्तीसगढ़ शासन ने 06/10/2025 को यशवंत केराम को कुलसचिव पद पर नई पदस्थापना दी।
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हाल ही में 02/01/2026 को राज्यपाल द्वारा जारी आदेश में आर.एल. खरे को प्रथम कुलसचिव के आदेशों का निर्माण करने का उल्लेख तो है, लेकिन इसमें यशवंत केराम को हटाने का कोई जिक्र नहीं है। इसी वजह से एक ही पद पर दो अधिकारी दावा कर रहे हैं।
देश का पहला ऐसा विश्वविद्यालय: ABVP
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रदेश सह मंत्री श्री प्रथम राव फूटाने ने इस स्थिति को प्रशासनिक लापरवाही बताया है। उन्होंने कहा, “छत्तीसगढ़ में कई विवि बिना स्थायी कुलपति के चल रहे हैं, लेकिन यह शायद देश का पहला विश्वविद्यालय है जहां एक ही समय में दो कुलसचिव कार्य कर रहे हैं। यह अत्यंत निंदनीय है। हम मांग करते हैं कि तत्काल वैध कुलसचिव की घोषणा हो ताकि छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ न हो।”










