रायपुर (ओमदर्पण न्यूज़)।
राजधानी रायपुर के हृदय स्थल कहे जाने वाले मोती बाग में एक प्रथम श्रेणी के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के परिजनों के साथ हो रहे कथित अन्याय ने सिस्टम और सुशासन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भू-माफियाओं और राजनीतिक रसूखदारों के गठजोड़ के चलते पीड़िता कामिनी मित्तल पिछले 6 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठी हैं। इस अन्याय के खिलाफ छत्तीसगढ़ के पूर्व गृहमंत्री ननकी राम कंवर भी दो दिन धरने पर बैठे, लेकिन स्वास्थ्य बिगड़ने के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। विडंबना यह है कि शासन और प्रशासन का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी अब तक पीड़िता की सुध लेने नहीं पहुंचा है।
मोती बाग की 3.5 एकड़ जमीन का है पूरा विवाद
यह पूरा मामला मोती बाग स्थित उस 3 एकड़ 50 डिसमिल जमीन से जुड़ा है, जो प्रथम श्रेणी के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी जगन्नाथ राय बहादुर के परिवार को कोटा के तहत आवंटित हुई थी। पिता की मृत्यु के बाद यह जमीन उनकी पुत्री ममता मित्तल को और बाद में उनके नाती-नतिनी कामिनी मित्तल और मीमोह मित्तल को हस्तांतरित हुई।
आरोप है कि तमाम दस्तावेज पक्ष में होने के बावजूद प्रशासन द्वारा इस परिवार को लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है। साल 2019 में तत्कालीन पटवारी कमलेश तिवारी द्वारा साजिश के तहत कंप्यूटर रिकॉर्ड से उक्त भूमि का डाटा हटा दिया गया था। इसके बाद से डाटा पुनः अपडेट करने के कई आदेश पारित हुए, पूर्व कलेक्टर सर्वेश्वर भूरे और जी.आर. चुरेन्द ने भी आदेश दिए, लेकिन राजस्व अधिकारियों ने आज तक रिकॉर्ड ऑनलाइन अपडेट नहीं किया।
अधिकारियों पर CM का नाम लेकर धमकाने और अभद्रता का आरोप
मामले में प्रशासनिक अधिकारियों का रवैया बेहद असंवेदनशील बताया जा रहा है। आरोप है कि संभागायुक्त महादेवन कावरे के निर्देश पर जब कामिनी मित्तल कार्यालय पहुंचीं, तो तहसीलदार राममूर्ति दीवान ने उन्हें 6 घंटे तक इंतजार करवाया। कार्यालय पहुंचने पर कामिनी मित्तल के साथ अभद्र व्यवहार किया गया। हद तो तब हो गई जब तहसीलदार दीवान ने कथित तौर पर सीधे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का नाम लेकर कहा कि कंप्यूटर रिकॉर्ड में नाम न जोड़ने का आदेश सीधे ऊपर से है।
पूर्व महापौर पर जमीन हथियाने के गंभीर आरोप
सूत्रों और दस्तावेजों के अनुसार, इस बेशकीमती जमीन पर पूर्व महापौर एजाज ढेबर की नजर है। आरोप है कि जमीन हथियाने के लिए घर में आग लगवाने, नल कनेक्शन काटने और सुपारी देने जैसे तमाम हथकंडे अपनाए गए। सिस्टम में भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हैं कि सारे आदेश पक्ष में होने के बावजूद राजस्व विभाग चुप्पी साधे बैठा है।
मैत्री नगर की भूमि पर भी कब्जा करने की कोशिश
प्रताड़ना का यह सिलसिला केवल मोती बाग तक सीमित नहीं है। कामिनी मित्तल के नाम पर मैत्री नगर में भी एक भूमि है, जिसका मुख्त्यारनामा 1996 से उनके पास है। 1 अप्रैल को सूचना मिली कि बाउंड्री वॉल के गेट का ताला तोड़कर किसी और ने अपना ताला लगा दिया है। पुलिस कमिश्नर और आयुक्त महादेवन कावरे को सूचना देने के बाद जब पीड़िता डीडी नगर थाने पहुंची, तो थाना प्रभारी शिवेंद्र राजपूत ने पल्ला झाड़ते हुए तहसीलदार प्रवीण परमार के पास भेज दिया। वहां जाने पर फाइल फेंक दी गई और पटवारी आकांक्षा साहू व आर.आई. मुकेश शुक्ला द्वारा अपशब्दों का प्रयोग किया गया।
वर्तमान कलेक्टर गौरव सिंह से शिकायत के बावजूद कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। इस पूरे घटनाक्रम में केवल एक अधिकारी राकेश देवांगन ने मौके पर पहुंचकर यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि ‘इस मामले में कुछ नहीं हो सकता, भूख हड़ताल तोड़ दो।’ यह स्थिति तब है जब एक स्वतंत्रता सेनानी के वंशज अपने अधिकारों के लिए दर-दर भटक रहे हैं और लोकतंत्र व संविधान की दुहाई दे रहे हैं।










