रायपुर |
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्पष्ट किया है कि छत्तीसगढ़ के किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सिंचाई सुविधाओं का विस्तार अनिवार्य है। उन्होंने जल संसाधन विभाग की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में निर्देश दिए कि लंबे समय से अधूरी पड़ी परियोजनाओं को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूर्ण किया जाए। मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि निर्माण कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
लंबित परियोजनाओं के लिए 346 करोड़ जारी
मुख्यमंत्री ने मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित बैठक में बताया कि प्रदेश सरकार ने लंबित परियोजनाओं को ‘अटल सिंचाई योजना’ में शामिल किया है। इसके अंतर्गत 115 परियोजनाओं के लिए 346 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है, जिससे 11 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचाई क्षमता विकसित होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंचाई परियोजनाओं के लिए बजट की कोई कमी नहीं है।
आगामी 3 वर्षों का रोडमैप
बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि अगले तीन वर्षों में लगभग 10 हजार करोड़ रुपये की लागत से 14 सिंचाई परियोजनाओं को चरणबद्ध तरीके से पूर्ण किया जाएगा। इससे प्रदेश के 70 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा मिलेगी। मार्च और मई माह में 4,800 करोड़ रुपये की लागत वाली चार प्रमुख परियोजनाओं का भूमिपूजन प्रस्तावित है।
इन प्रमुख परियोजनाओं का होगा भूमिपूजन:
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बस्तर: देउरगांव बैराज सह उद्वहन सिंचाई परियोजना।
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बस्तर: मटनार बैराज सह उद्वहन सिंचाई परियोजना।
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रायपुर (आरंग): महानदी पर मोहमेला–सिरपुर बैराज योजना।
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गरियाबंद: सिकासार जलाशय से कोडार जलाशय लिंक परियोजना।
नवाचार और तकनीकी अध्ययन पर जोर
जशपुर के किसानों के मध्य प्रदेश भ्रमण का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि किसानों को उन राज्यों का भ्रमण कराया जाए जहां सिंचाई के क्षेत्र में आधुनिक तकनीक का उपयोग हो रहा है। साथ ही, अंतर्राज्यीय जल विवादों जैसे महानदी जल विवाद, पोलावरम बांध और समक्का बैराज के मामलों को अगले तीन वर्षों में सुलझाने के लिए ठोस प्रयास करने के निर्देश दिए गए।









