रायपुर (ओमदर्पण न्यूज़)।
छत्तीसगढ़ के महिला एवं बाल विकास विभाग में भ्रष्टाचार और बजट खपाने का एक अनोखा मामला सामने आया है। सक्षम आंगनबाड़ी योजना के तहत विभाग मूली-गाजर की तरह टीवी और वाटर प्यूरीफायर (आरओ) की धड़ल्ले से खरीदी कर रहा है। योजना के तहत वर्ष 2023-24 और 2024-25 के लिए 16.61 करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत है, जिससे आंगनबाड़ी केंद्रों को अपग्रेड किया जाना है।
नियमों के तहत इतनी बड़ी राशि की खरीदी के लिए केंद्रीय टेंडर निकाला जाना चाहिए था, लेकिन टेंडर प्रक्रिया से बचने के लिए इस पूरे काम को 155 टुकड़ों (ब्लॉकों) में बांट दिया गया है।
बिना तकनीकी मापदंड के हो रही खरीदी
विभागीय सूत्रों और मीडिया पड़ताल के अनुसार, अगर केंद्रीय स्तर पर खरीदी होती तो हर सामान की तकनीकी शर्तें (Specifications) देनी पड़तीं। अब हर ब्लॉक में सिर्फ यह कहकर खरीदी की जा रही है कि 25 हजार रुपए का टीवी और 10 हजार रुपए का आरओ लेना है। जेम (GeM) पोर्टल पर ठेकेदार तीन कोटेशन बनाकर दे रहा है और उसे भुगतान किया जा रहा है।
हैरानी की बात यह है कि विभाग ने ब्लॉक अधिकारियों को कोई तकनीकी मापदंड नहीं बताए हैं। ठेकेदार चाहे 5 हजार की टीवी दे या 10 हजार की, 18 इंच की दे या 28 इंच की, या फिर चाइनीज माल सप्लाई कर दे, इसकी कोई निगरानी नहीं है। गरियाबंद जिले के देवभोग और मैनपुर ब्लॉक में तो खरीदी भी पूरी हो चुकी है।
2899 केंद्रों में खरीदी, रेन वाटर सिस्टम में भी गोलमाल
प्रदेश के 2899 आंगनबाड़ी केंद्रों में 1 टीवी और 1 आरओ की खरीदी की जा रही है। किसी ब्लॉक में 10 तो किसी में 20 केंद्र चिन्हित हैं। 10 लाख रुपए से कम की खरीदी कोटेशन स्तर पर हो सकती है, इसलिए हर ब्लॉक में टीवी के लिए 5 लाख और आरओ के लिए 2 लाख रुपए भेजे गए हैं।
यही हाल वाल पेंटिंग और रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का है। हर आंगनबाड़ी में वाल पेंटिंग के लिए 10 हजार और रेन वाटर हार्वेस्टिंग के लिए 16 हजार रुपए भेजे गए हैं। प्रदेश की 2234 आंगनबाड़ियों में हार्वेस्टिंग सिस्टम के लिए 3.57 करोड़ और वाल पेंटिंग पर 2.89 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इसमें भी यह स्पष्ट नहीं है कि हार्वेस्टिंग सिस्टम किस तकनीक या गुणवत्ता का लगेगा।
महज 3 दिन में पूरा होना है ‘खेल’
सक्षम आंगनबाड़ी योजना में 60 प्रतिशत केंद्रांश और 40 प्रतिशत राज्यांश शामिल है। पिछले दो साल से यह बजट रखा हुआ था। वित्तीय वर्ष समाप्त होने पर केंद्रांश लैप्स हो जाता, इसलिए 19 मार्च की रात को संयुक्त संचालक द्वारा सभी ब्लॉक परियोजना अधिकारियों को अपने स्तर पर खरीदी करने का आदेश और बजट भेज दिया गया।
25 मार्च के बाद ट्रेजरी में कोई बिल नहीं लगता है। बीच में तीन दिन की छुट्टी भी है। यानी सिर्फ तीन कार्य दिवसों में ऑर्डर देना, सामान खरीदना, भौतिक सत्यापन करना, बिल लगाना और भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जानी है, जो कई सवाल खड़े कर रही है।
अधिकारियों का पक्ष
इस पूरे मामले पर महिला एवं बाल विकास विभाग की संचालक रेणुका श्रीवास्तव का कहना है कि, “केंद्र सरकार ने हमें 18 मार्च को राशि भेजी है। इसके बाद हमने तुरंत ब्लॉक में राशि भेज दी है। अब वे जेम पोर्टल से एल-1 (सबसे कम रेट) आने वाले से खरीदी करेंगे। जेम में टेंडर लाइव है और मापदंड पहले ही डाले जा चुके हैं। अगर अभी खरीदी नहीं होगी तो अगले वित्तीय वर्ष में करेंगे।”










