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इजराइल-ईरान तनाव के बीच रायपुर में दिखा अनोखा ‘ऊर्जा संरक्षण’, गैस की बजाय लकड़ी पर बना 300 किलो आटे का भंडारा

Raipur Rawabhata News

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रायपुर (ओमदर्पण न्यूज़)। इज़राइल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण उत्पन्न वैश्विक ऊर्जा संकट के इस दौर में ऊर्जा संरक्षण समय की सबसे बड़ी मांग बन गया है। इसी दिशा में राजधानी रायपुर के रावाभाठा स्थित माता दंतेश्वरी मंदिर में एक अनोखी और सराहनीय पहल देखने को मिली। यहां अविनाश पांडे के नेतृत्व में हर वर्ष की तरह इस साल भी विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, लेकिन इस बार का यह आयोजन समाज को ऊर्जा संरक्षण का एक बड़ा संदेश दे गया।

गैस के बजाय लकड़ी पर बना भोजन, मिस्त्री भी कर रहे थे मना

समाज को ऊर्जा संरक्षण का संदेश देने के उद्देश्य से इस बार आयोजन समिति ने कमर्शियल गैस सिलेंडर के स्थान पर पारंपरिक तरीके से लकड़ी का उपयोग कर भोजन तैयार करने का निर्णय लिया। आज के आधुनिक दौर में लकड़ी से खाना बनाने की परंपरा लगभग खत्म हो चुकी है। ऐसे में लगभग 300 किलोग्राम आटे की पूड़ियाँ और भारी मात्रा में सब्ज़ी तैयार करना अपने आप में एक बड़ी चुनौती थी।

शुरुआत में खाना बनाने वाले मिस्त्री (रसोइए) भी लकड़ी पर इतना बड़ा काम करने के लिए तैयार नहीं हो रहे थे। लेकिन समिति के सदस्यों के सतत प्रयास, सहयोग और अथक मेहनत से यह कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया गया। सभी साथियों ने खुद आगे आकर श्रमदान किया और इस भव्य आयोजन को सफल बनाया।

 युवाओं का रहा विशेष योगदान

भंडारे के इस पुनीत कार्य और ऊर्जा संरक्षण की मुहिम में कई लोगों ने कंधे से कंधा मिलाकर साथ दिया। इस आयोजन को सफल बनाने में मुख्य रूप से अविनाश पांडे, अवनीश पांडे, शिव कुमार सिंह, अनीश मिश्रा, सतेंद्र गिरी, सूरज तिवारी, करण सिंह, निलेश पांडे, अक्षय पांडे, मोंटू भैया, अवधेश गोस्वामी, राजू तिवारी, छोटे लाल (ढाबा वाले), विजय शर्मा, शंकर यादव, लोकनाथ साहू, संतोष साहू और भूपेंद्र दुबेदी सहित अन्य सभी सदस्यों का अहम योगदान रहा।

दिया प्रेरणादायक संदेश

यह प्रयास न केवल एक धार्मिक आयोजन तक सीमित रहा, बल्कि समाज के लिए एक प्रेरणादायक संदेश भी बनकर उभरा है। इस आयोजन ने साबित कर दिया कि— “ऊर्जा की बचत करें, परंपराओं को अपनाएं और सामूहिक प्रयास से बड़े कार्य संभव बनाएं।” क्षेत्रवासियों ने इस उत्कृष्ट आयोजन के लिए अविनाश पांडे और उनके सभी सहयोगियों के प्रयासों की भूरि-भूरि प्रशंसा की है।

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