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मुक्ताकाशी मंच पर शास्त्रीय नृत्य और संगीत के जरिए कलाकारों ने वर्षा ऋतु के सौंदर्य को किया जीवंत
✍️ विशेष संवाददाता
रायपुर | छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के मुक्ताकाशी मंच पर सावन की फुहारों और बादलों की मौजूदगी में ‘पावस प्रसंग’ का भव्य आयोजन हुआ। प्रकृति के मनोहारी परिवेश में आयोजित इस सांस्कृतिक संध्या में शास्त्रीय नृत्य और संगीत की प्रस्तुतियों ने वर्षा ऋतु के विभिन्न भावों को जीवंत कर दिया। कार्यक्रम के दौरान शास्त्रीय सुरों और घुंघरुओं की झंकार ने पूरे वातावरण को संगीतमय बना दिया, जिससे दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए।
*** कथक और शास्त्रीय गायन की प्रभावशाली प्रस्तुतियां ***
कार्यक्रम में शाश्वती बैनर्जी ने कथक के माध्यम से सावन की उमंग और वर्षा की रिमझिम को प्रभावशाली मुद्राओं में प्रस्तुत किया। उनके साथ ही इशिका गिरी ने भी कथक की बारीकियों के साथ वर्षा ऋतु के उल्लास को मंच पर उतारा और दर्शकों की सराहना बटोरी। शास्त्रीय गायन के क्षेत्र में मेघा बोस के सुमधुर स्वरों ने पावस ऋतु की कोमल अनुभूतियों को स्वर प्रदान किए। वहीं, मेवाती घराने के गायक प्रदीप कुमार चौबे ने अपनी गायकी से पूरे माहौल को सुरमयी बना दिया।
*** साहित्य परिषद के अध्यक्ष ने कलाकारों को किया सम्मानित ***
समारोह के दौरान साहित्य परिषद के अध्यक्ष शशांक शर्मा ने प्रतिभागी कलाकारों को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि शास्त्रीय कलाएं सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा हैं और ऐसे मंचों से नई पीढ़ी में कला के प्रति रुचि बढ़ती है। कार्यक्रम का संचालन डॉ. संजय कनौजे ने किया और कलाकारों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें निरंतर प्रोत्साहन देने की बात कही। इस अवसर पर उप संचालक उमेश मिश्रा, वरिष्ठ पत्रकार एवं फोटोग्राफर दीपेंद्र दीवान और उदयभान सिंह सहित बड़ी संख्या में कला प्रेमी उपस्थित रहे।








