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आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव ने कहा—वंदे मातरम का हर शब्द मातृभूमि के प्रति नागरिकों के गहरे प्रेम और समर्पण को दर्शाता है
नई दिल्ली।
आयुष मंत्रालय ने आज आयुष भवन के केंद्रीय प्रांगण में भारत के राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने पर एक विशेष सामूहिक गायन कार्यक्रम आयोजित किया। यह आयोजन संस्कृति मंत्रालय की राष्ट्रव्यापी पहल के अनुरूप किया गया, जिसका उद्देश्य इस ऐतिहासिक रचना की अमर विरासत को सम्मान देना था।
कार्यक्रम में आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने मंत्रालय के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ वंदे मातरम का सामूहिक गायन किया और राष्ट्र के प्रति समर्पण का संदेश दिया।
“वंदे मातरम राष्ट्रीय जागरण का कालातीत प्रतीक है” — जाधव
अपने संबोधन में मंत्री जाधव ने कहा कि “वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने का जश्न मनाते हुए हम उस गीत का सम्मान कर रहे हैं, जिसने ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष के दौरान राष्ट्रीय जागरण का एक शक्तिशाली प्रतीक और ज्वलंत नारा बनकर राष्ट्र को एकजुट किया। इस कालजयी रचना का हर शब्द मातृभूमि के प्रति हमारे नागरिकों के गहरे प्रेम और समर्पण को दर्शाता है।”
उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमेशा इस बात पर ज़ोर दिया है कि “विकास के साथ-साथ हमारी विरासत का भी संरक्षण होना चाहिए।”
सांस्कृतिक एकता और विरासत का प्रतीक बना समारोह
सामूहिक गायन के बाद प्रतिभागियों ने कौटिल्य सम्मेलन कक्ष में संस्कृति मंत्रालय द्वारा तैयार की गई वंदे मातरम की विरासत पर विशेष प्रस्तुति देखी। कार्यक्रम का समापन प्रधानमंत्री के संबोधन के लाइव प्रसारण से हुआ, जिसमें राष्ट्रव्यापी स्मरणोत्सव का औपचारिक शुभारंभ किया गया।
इस अवसर पर संस्कृति मंत्रालय ने एक विशेष वेबसाइट — https://vandemataram150.in/ — भी लॉन्च की, ताकि देशभर में इस गीत की ऐतिहासिक यात्रा और योगदान को साझा किया जा सके।
वंदे मातरम: राष्ट्र की आत्मा से जुड़ा गीत
दशकों से वंदे मातरम अपने साहित्यिक उद्भव ‘आनंदमठ’ से आगे बढ़कर राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक बन चुका है। यह गीत मातृभूमि को शक्ति, समृद्धि और दिव्यता के रूप में देखने की भावना को दर्शाता है। इसकी एकता और आत्मसम्मान की प्रेरणा ने स्वतंत्रता आंदोलन में जनसहभागिता को बढ़ाया और इसे भारत की सामूहिक स्मृति का स्थायी अंग बना दिया।
आयुष मंत्रालय की सांस्कृतिक प्रतिबद्धता का उदाहरण
इस अवसर पर मंत्रालय की सक्रिय भागीदारी ने राष्ट्रीय सांस्कृतिक आयोजनों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को प्रदर्शित किया। यह आयोजन मंत्रालय के कर्मचारियों के लिए एक ऐसा क्षण बना जिसने देशभक्ति और सामूहिक एकता की भावना को और प्रबल किया।











