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सावधान! गुढ़ियारी में क्राइम होने पर गुढ़ियारी पुलिस को लिखें खत, क्योंकि 112 और 9407924310 तो ‘वेंटिलेटर’ पर हैं…

सावधान! गुढ़ियारी में क्राइम होने पर गुढ़ियारी पुलिस को लिखें खत

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गुढ़ियारी थाना जहाँ 112 की गाड़ियों को लग रहा है ‘जंग’ और सरकारी नंबर 9407924310 को लग गया है ‘कोमा’ !

सावधान! गुढ़ियारी में क्राइम होने पर गुढ़ियारी पुलिस को लिखें खत सावधान! गुढ़ियारी में क्राइम होने पर गुढ़ियारी पुलिस को लिखें खत

(रणविजय सिंह की विशेष रिपोर्ट)

रायपुर ।

राजधानी रायपुर में कमिश्नरी सिस्टम लागू है। बड़े-बड़े होर्डिंग्स पर ‘स्मार्ट पुलिसिंग’, ‘क्विक रिस्पॉन्स’ और ‘जनता के द्वार’ जैसे भारी-भरकम शब्द लिखे जाते हैं। लेकिन अगर आपको रायपुर पुलिस के इन विज्ञापनों की असलियत देखनी है, तो किसी अपराध का इंतज़ार मत कीजिए; बस एक बार गुढ़ियारी थाने (जोन-उत्तर) की तरफ रुख कर लीजिए। यहाँ का ‘सिस्टम’ इतना हाईटेक है कि आपातकाल में डायल 112 की गाड़ियां गैरेज से बाहर निकलने से मना कर देती हैं, और थाने का सरकारी नंबर ‘स्विच ऑफ’ बोलकर आपको आपके हाल पर छोड़ देता है।

यह कोई अफवाह नहीं, बल्कि रायपुर के बीचों-बीच चल रहा ‘लचर पुलिसिंग’ का वह नंगा सच है, जिसने आम जनता को अपराधियों के सामने निहत्था छोड़ दिया है।

डायल 112 या ‘डायल 9-2-11’?

छत्तीसगढ़ में डायल 112 की शुरुआत इस वादे के साथ हुई थी कि शहर के किसी भी कोने से कॉल आने पर पुलिस 10 से 15 मिनट के भीतर मौके पर पहुंचेगी। लेकिन गुढ़ियारी थाने ने इस वादे की ऐसी धज्जियां उड़ाई हैं कि खुद पुलिस विभाग को शर्म आ जाए। यहाँ डायल 112 सेवा पूरी तरह से ठप पड़ी है। कारण? थाने की 112 वाली 2 गाड़ियां कई दिनों से ‘खराब’ पड़ी हैं।

ज़रा सोचिए! राजधानी के एक प्रमुख थाने में, जहाँ रोज़ाना चोरी, मारपीट और अपराध के मामले सामने आते हैं, वहाँ की पेट्रोलिंग गाड़ियां ‘आईसीयू’ में भर्ती हैं। क्या रायपुर कमिश्नरेट के पास इतना भी बजट नहीं है कि इन गाड़ियों को ठीक कराया जा सके? या फिर अधिकारियों ने यह मान लिया है कि गुढ़ियारी के चोर-लुटेरे अब ‘वर्क फ्रॉम होम’ कर रहे हैं, इसलिए पुलिस को गश्त करने की कोई ज़रूरत नहीं है?

जब रात के 2 बजे जनता मदद के लिए 112 पर चीखती-चिल्लाती है, तो ये गाड़ियां थाने में खड़ी होकर अपनी ‘किस्मत’ पर रो रही होती हैं। नतीजा यह होता है कि पुलिस को घटनास्थल तक पहुँचने में एक घंटा 34 मिनट लग जाते हैं। अगर यह देरी किसी हत्या, डकैती या बलात्कार के मामले में होती, तो क्या गुढ़ियारी पुलिस लाश उठने के बाद अपनी खराब गाड़ियों को धक्का मारते हुए वहां पहुँचती? 112 की इन गाड़ियों को अब या तो कबाड़ में बेच देना चाहिए या फिर किसी ‘म्यूजियम’ में रख देना चाहिए, क्योंकि अपराध रोकने के काम तो ये आ नहीं रहीं।

रहस्यमयी नंबर 9407924310: यह फोन है या कोई मजाक?

 

 

अब आते हैं स्मार्ट पुलिसिंग के दूसरे सबसे बड़े मजाक पर—गुढ़ियारी पुलिस थाना का सरकारी नंबर 9407924310। किसी भी सभ्य समाज में थाने का नंबर वह आखिरी उम्मीद होती है, जिसे एक आम नागरिक खौफ के समय डायल करता है। लेकिन गुढ़ियारी थाने का यह नंबर तो मानो ‘डिजिटल संन्यास’ ले चुका है।

जब 112 की ‘बैलगाड़ी’ समय पर नहीं पहुंची, तो पीड़ित जनता ने सीधे थाने के इस नंबर पर कॉल करना मुनासिब समझा। लेकिन यह क्या? फोन तो बंद था! लगातार कॉल करने के बाद भी इस नंबर से कोई जवाब नहीं मिला। क्या थाने के ड्यूटी ऑफिसर ने इसे बंद करके अपनी जेब में रख लिया था, ताकि उनकी नींद खराब न हो? या फिर इस सरकारी नंबर का ‘रिचार्ज’ कराने के लिए पुलिस को चंदा इकट्ठा करना पड़ रहा है? यह नंबर बंद होना सिर्फ एक तकनीकी खराबी नहीं है; यह सीधे तौर पर जनता की जान के साथ खेला जा रहा एक खौफनाक ‘रूसी रूले’ (Russian Roulette) है।

अगर कोई व्यक्ति अपनी आखिरी सांसें गिनते हुए इस नंबर पर कॉल करे, तो उसे सिर्फ यह सुनने को मिलेगा कि “आपके द्वारा डायल किया गया नंबर अभी बंद है।” क्या कमिश्नर साहब इस बात का जवाब देंगे कि आपातकालीन स्थिति में थानों के लैंडलाइन और सरकारी मोबाइल नंबर बंद रखना कौन सी ‘मैनुअल’ में लिखा है?

राम भरोसे सुरक्षा: सिस्टम को हुआ ‘क्रोनिक’ बीमारी

गुढ़ियारी थाने की यह हालत किसी एक दिन की लापरवाही का नतीजा नहीं है। यह उस ‘सिस्टमैटिक फेलियर’ का सुबूत है, जहाँ जवाबदेही नाम की कोई चीज़ नहीं बची है। जब 112 की गाड़ियां गैरेज में धूल फांक रही हों और थाने का सरकारी नंबर 9407924310 हमेशा आउट ऑफ नेटवर्क रहता हो, तो इसका सीधा संदेश अपराधियों के लिए होता है: “बेखौफ होकर क्राइम करो, पुलिस अभी सो रही है!”

यह रायपुर कमिश्नरेट के लिए एक वेक-अप कॉल (Wake-up call) है। अगर अब भी नींद नहीं टूटी, तो वह दिन दूर नहीं जब जनता को अपनी सुरक्षा के लिए डंडे लेकर खुद ही सड़कों पर उतरना पड़ेगा और गुढ़ियारी थाने के बाहर ‘ आउट ऑफ सर्विस’ का बोर्ड लटकाना पड़ेगा।


गुढ़ियारी पुलिस और उच्च अधिकारियों से कुछ ‘तीखे और कड़वे’ सवाल:  दो जवाब….

  1. क्या 9407924310 नंबर को सिर्फ डायरी में छपवाने के लिए लिया गया है, या इसे उठाने का भी कोई इरादा है?

  2. गुढ़ियारी थाने की 112 गाड़ियों को ठीक कराने का बजट क्या किसी ‘भ्रष्टाचार’ की भेंट चढ़ गया है?

  3. क्या थाने का सरकारी मोबाइल (9407924310) स्विच ऑफ रखना ‘स्मार्ट पुलिसिंग’ का नया सिलेबस है?

  4. जब 112 की गाड़ियां खराब हैं, तो क्या पुलिसकर्मी रात को चोर पकड़ने ‘पैदल’ या ‘ई-रिक्शा’ से जाते हैं?

  5. कमिश्नर साहब, क्या आप उस ड्यूटी ऑफिसर को सस्पेंड करेंगे जिसने 9407924310 को बंद करके जनता को मरने के लिए छोड़ दिया?

  6. डेढ़ घंटे की देरी से पहुंचने वाली 112 सेवा का नाम बदलकर ‘कल सुबह 112’ क्यों नहीं कर दिया जाता?

  7. क्या गुढ़ियारी पुलिस ने अपराधियों के साथ कोई ‘नो-डिस्टर्बेंस पैक्ट’ (No-Disturbance Pact) साइन कर रखा है?

  8. खराब गाड़ियों और बंद नंबरों के सहारे रायपुर कमिश्नरेट आखिर किस तरह के ‘सुरक्षित शहर’ का सपना देख रहा है?

  9. क्या 112 की गाड़ियों में पेट्रोल डालने के पैसे खत्म हो गए हैं या उन्हें चलाने के लिए ‘ड्राइवर’ नहीं बचे हैं?

  10. जब आपातकाल में नंबर (9407924310) बंद ही रखना है, तो थाने के बाहर इस नंबर का बोर्ड क्यों लगा रखा है? इसे पुतवा क्यों नहीं देते?

  11. क्या 112 के कंट्रोल रूम वालों को पता भी है कि गुढ़ियारी की गाड़ियां खराब हैं, या वे सिर्फ ‘कॉल फॉरवर्ड’ खेलने में व्यस्त हैं?

  12. अगर किसी नेता की भैंस चोरी होती, तो क्या तब भी 112 की गाड़ियां गैरेज में ही खड़ी रहतीं या रातों-रात ठीक हो जातीं?

  13. क्या गुढ़ियारी थाने के प्रभारी को इस बात की कोई शर्म है कि उनका सरकारी नंबर लगातार बंद पाया जाता है?

  14. राजधानी के बीचों-बीच 112 सेवा का ‘पैरालाइज’ (लकवाग्रस्त) हो जाना क्या पुलिस प्रशासन की नाकामी का सबसे बड़ा सुबूत नहीं है?

  15. जनता पूछती है: क्या हम टैक्स इसलिए देते हैं ताकि पुलिस की गाड़ियां गैरेज में सड़ें और सरकारी फोन स्विच ऑफ रहें?

 

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