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जल संरक्षण की बड़ी पहल: जिले में बनेंगी 54 आजीविका डबरियां; खेती-किसानी के साथ मछली पालन से बढ़ेगी ग्रामीणों की आय

आजीविका डबरी निर्माण

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आजीविका डबरी निर्माण आजीविका डबरी निर्माण

  • विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका मिशन: युक्तधारा और GIS तकनीक से हुआ चयन

  • कलेक्टर अभिजीत सिंह और CEO बजरंग कुमार दुबे ने ग्रामीणों से की योजना का लाभ लेने की अपील

दुर्ग (रोहितास सिंह भुवाल)।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और जल संरक्षण की दिशा में जिला प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। ‘विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण’ (VBGRAMG) के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए जिले में 54 ‘आजीविका डबरी’ निर्माण का लक्ष्य तय किया गया है। यह पहल न केवल भू-जल स्तर सुधारेगी, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगी।

प्रशासनिक जानकारी के अनुसार, इन डबरियों का निर्माण वैज्ञानिक पद्धति से किया जाएगा। इसके लिए ‘युक्तधारा’ के माध्यम से GIS (जीआईएस) आधारित प्लान और सैटेलाइट सर्वे का उपयोग कर लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। इस योजना का मुख्य उद्देश्य वर्षा जल का संचयन और भू-जल रिचार्ज करना है। डबरी निर्माण से किसानों को खरीफ और रबी, दोनों फसलों के लिए सिंचाई की सुविधा मिलेगी, जिससे पैदावार में बढ़ोतरी होगी।

अधिकारियों की अपील: ग्राम अर्थव्यवस्था का प्रभावी मॉडल

कलेक्टर अभिजीत सिंह और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) बजरंग कुमार दुबे ने इसे ग्राम अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने का एक प्रभावी मॉडल बताया है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की है कि वे ‘जी-राम-जी’ (G-RAM-G) योजना के अंतर्गत आजीविका डबरी निर्माण के लिए आगे आएं। अधिकारियों ने बताया कि यह योजना विभिन्न विभागों के समन्वय (कन्वर्जेन्स) से चल रही है। इससे न सिर्फ खेती को मजबूती मिलेगी, बल्कि पशुपालन और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों से ग्रामीणों को अतिरिक्त आय भी होगी।

विशेष ग्राम सभाओं में पारित हुए प्रस्ताव

योजना को धरातल पर उतारने के लिए ग्राम पंचायतों में विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन कर प्रस्ताव पारित किए गए हैं। इन सभाओं में सरपंच, पंच और जनपद सदस्यों ने हिस्सा लिया। जनप्रतिनिधियों ने माना कि मनरेगा के तहत बनने वाली ये डबरियां भविष्य में सिंचाई और आजीविका का स्थायी साधन बनेंगी।

महिलाओं और समूहों को मिलेगा विशेष लाभ

यह योजना स्व-सहायता समूह की दीदियों के लिए आजीविका सुरक्षा को और मजबूत करेगी। प्रशासन का दावा है कि डबरी निर्माण से रोजगार सृजन होगा और पलायन रुकेगा। अधिनियम के तहत होने वाले ये कार्य राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना का हिस्सा होंगे, जो सीधे तौर पर जल सुरक्षा और बुनियादी ढांचे को मजबूत करेंगे।

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