छत्तीसगढ़ में ओबीसी आरक्षण को लेकर बढ़ा विवाद, हाईकोर्ट में सुनवाई की तैयारी
OM Darpan
Jan 15, 2025 08:54 pm
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15 Jan 2025
याचिकाकर्ता नरेश रजवाड़े ने छत्तीसगढ़ सरकार के ओबीसी आरक्षण को शून्य करने के फैसले को चुनौती दी है। उन्होंने अपनी याचिका में बताया कि राज्य सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम की धारा 129(ड.) की उपधारा (03) को हटाने के लिए 3 दिसंबर 2024 को एक अध्यादेश लाया गया था। इस अध्यादेश के जरिए पांचवीं अनुसूची में शामिल जिलों में ओबीसी वर्ग को आरक्षण देने का प्रावधान खत्म कर दिया गया।याचिकाकर्ता के मुताबिक, भारत के संविधान के अनुच्छेद 213 के तहत कोई भी अध्यादेश अधिकतम छह महीने तक प्रभावी रह सकता है। इसके बाद इसे विधानसभा के सत्र में अनिवार्य रूप से पारित कर कानून का रूप दिया जाना चाहिए। हालांकि, राज्य सरकार ने 16 से 20 जनवरी 2024 तक आयोजित छत्तीसगढ़ विधानसभा के सत्र में इस महत्वपूर्ण अध्यादेश को पारित कराने के बजाय सिर्फ पटल पर रखा। इससे यह अध्यादेश विधिशून्य और औचित्यहीन हो गया है। याचिका में दावा किया गया है कि सरकार की इस चूक के कारण 24 दिसंबर 2024 को छत्तीसगढ़ पंचायत निर्वाचन नियम (5) में किया गया संशोधन भी पूरी तरह से अवैध हो गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि इस अवैधानिक संशोधन के आधार पर संचालक पंचायत और सभी जिलों के कलेक्टरों द्वारा जारी किया गया आरक्षण रोस्टर भी अवैधानिक है। याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से अपील की है कि छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम के पूर्व प्रावधानों के आधार पर वैधानिक रूप से नया आरक्षण रोस्टर तैयार किया जाए और पंचायत चुनाव करवाया जाए।
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