- माओवादी इतिहास, वर्तमान और भविष्य पर चर्चा
- जवानों और माओवादियों के संघर्ष में हताहतों की संख्या का खुलासा
जगदलपुर (कौशल संदुजा)।
माओवादियों की केंद्रीय कमेटी ने अपनी 20वीं स्थापना वर्षगांठ के मौके पर 25 पन्नों की एक बुकलेट जारी की है, जो 21 सितंबर से 20 अक्टूबर तक मनाई जाएगी। इस बुकलेट में माओवादी इतिहास, वर्तमान और भविष्य का ज़िक्र किया गया है। कम्युनिस्ट विचारधारा और हथियारबंद विद्रोह को महान क्रांति बताया गया है।
बुकलेट में माओवादियों और सुरक्षाबलों के बीच पिछले 20 वर्षों के संघर्ष की विस्तृत जानकारी दी गई है। माओवादियों ने बताया कि बीते साढ़े तीन सालों में उनके 439 सदस्य मारे गए और उन्हें 215 हथियारों का नुकसान हुआ। माओवादियों के मुताबिक, इस दौरान संगठन के 8 पोलित ब्यूरो समेत केंद्रीय कमेटी के 22 सदस्य मारे गए, और 1000 महिला माओवादियों ने अपनी जान गंवाई। पिछले 20 सालों में 5,249 माओवादी मारे गए हैं, जिनमें सैक/एसजेडसी/एससी के 48 सदस्य, आरसी के 14, जेडसी/डीवीसी/डीसी के 167, सबजोनल कमेटी के 26, एसी/पीपीसी के 505, और पार्टी व पीएलजीए के 871 सदस्य शामिल हैं। इसके अलावा, माओवादियों ने 3596 मौतों को जन निर्माण कार्यकर्ता और क्रांतिकारी जनता बताया है। पिछले एक साल में ही 218 सदस्यों, कार्यकर्ताओं और नेताओं की मौत का उल्लेख किया गया है।
सुरक्षाबलों पर 4073 बड़े, मझौले और छोटे हमलों की जानकारी दी गई है, जिनमें 3090 जवानों की मौत हुई और 4,077 जवान घायल हुए। माओवादियों ने इन हमलों को कार्यनीतिक जवाबी हमले बताया है। बुकलेट के अनुसार, जवानों से 2,365 आधुनिक हथियार और 1,19,682 कारतूस लूटे गए हैं। 2021 से जुलाई 2024 तक 669 गुरिल्ला युद्ध कार्यवाहियों में 261 जवान मारे गए और 516 जवान घायल हुए। माओवादियों ने इन हमलों से 25 हथियारों को हासिल करने की जानकारी दी है।
माओवादियों ने बुकलेट में संगठन को हुए बड़े नुकसान की भी जानकारी दी है। इसके अलावा, जंगलों, बीहड़ों और देहातों से लेकर शहरों तक लड़ाई जारी रखने की बात कही गई है। बुकलेट में भारत की मौजूदा व्यवस्था के खिलाफ़ हथियारबंद युद्ध छेड़ने की रणनीति और तुर्की, फिलीपींस समेत अन्य देशों में सक्रिय माओवादी गतिविधियों का भी उल्लेख किया गया है।









