रायपुर। छत्तीसगढ़ में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर शराब और मांस की बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। शासन के आदेशानुसार शुक्रवार, 4 सितंबर को प्रदेशभर में शुष्क दिवस (ड्राई-डे) घोषित किया गया है। इस दौरान नगरीय निकायों की सीमा में स्थित पशुवध गृह और मांस बिक्री की दुकानें भी बंद रहेंगी।
आबकारी और नगरीय प्रशासन विभाग ने इस संबंध में अलग-अलग आदेश जारी किए हैं। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रतिबंध का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें। ड्राई-डे के दौरान देशी-विदेशी शराब दुकानें, रेस्टोरेंट-बार, होटल-बार, क्लब और अहाता सहित शराब परोसने वाले सभी लाइसेंसी प्रतिष्ठान बंद रखे जाएंगे।
शराब के अवैध परिवहन, संग्रहण और बिक्री पर लगाम कसने के लिए जिला, संभाग और राज्य स्तर पर उड़नदस्तों का गठन किया गया है। ये टीमें संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखेंगी और उल्लंघन पाए जाने पर तत्काल कार्रवाई करेंगी।
भांग और भांगघोटा की दुकानें भी बंद
आदेश के मुताबिक, शराब के साथ-साथ भांग और भांगघोटा की दुकानें भी बंद रहेंगी। शासन का मानना है कि ऐसे प्रतिबंधों से त्योहारों के दौरान कानून-व्यवस्था बनी रहती है और आपराधिक घटनाओं जैसे हत्या, छेड़छाड़ और सड़क हादसों में कमी आती है। वर्तमान में राज्य में केवल 4 दिन ही शुष्क दिवस घोषित हैं।
67 नई शराब दुकानें खोलने की तैयारी
शराबबंदी को लेकर प्रदेश में राजनीतिक सरगर्मी भी तेज है। भाजपा ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर गंगाजल की कसम खाकर वादाखिलाफी का आरोप लगाया था। वहीं, वर्तमान सरकार के कार्यकाल में 67 नई शराब दुकानें खोलने की तैयारी का प्रदेश के कई हिस्सों में विरोध हुआ है। कई जगहों पर विरोध के बावजूद दुकानें खोल दी गई हैं।
राजस्व पर टिका वित्तीय ढांचा
प्रदेश में पूर्ण शराबबंदी लागू करना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। इसका मुख्य कारण राज्य की आर्थिक स्थिति है, जो काफी हद तक शराब बिक्री से मिलने वाले राजस्व पर निर्भर है। इसके अलावा, वनांचल क्षेत्रों में शराब सेवन की सामाजिक स्वीकार्यता और कच्ची शराब बनाने की परंपरा को अचानक रोकना व्यावहारिक रूप से कठिन माना जा रहा है।









