नस्ल सुधार से बदली किस्मत: देशी गाय से साहीवाल और गिर नस्ल मिली, अब रोज 10 लीटर दूध बेच रहे नेहर साय
OM Darpan
सरगुजा। परंपरागत पशुपालन में वैज्ञानिक तरीके और नस्ल सुधार को अपनाकर ग्रामीण परिवार अपनी आजीविका को मजबूत कर सकते हैं। सरगुजा जिले की ग्राम पंचायत देवरी निवासी श्री नेहर साय कुजूर ने पशुधन विकास विभाग के मार्गदर्शन से इसी दिशा में कदम बढ़ाया है। देशी गाय में कृत्रिम गर्भाधान के माध्यम से नस्ल सुधार और पशुओं की बेहतर देखभाल से दूध उत्पादन बढ़ा है। अब पशुपालन से होने वाली नियमित आमदनी उनके परिवार की दैनिक जरूरतों को पूरा करने में सहायक बन रही है।
श्री नेहर साय बताते हैं कि पहले उनके पास सामान्य देशी गाय थी। पशुधन विकास विभाग के पशु चिकित्सकों से सलाह मिलने के बाद उन्होंने गाय में कृत्रिम गर्भाधान कराया। इससे उन्हें साहीवाल नस्ल की बछिया प्राप्त हुई। इसके बाद नस्ल सुधार की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए क्रॉसिंग के माध्यम से गिर नस्ल की गाय भी प्राप्त हुई।
नस्ल सुधार से बढ़ी पशुओं की उत्पादकता
बेहतर नस्ल और उचित पशुपालन प्रबंधन का असर दूध उत्पादन में दिखाई दे रहा है। वर्तमान में उनकी दोनों गायों से प्रतिदिन लगभग 8 से 10 लीटर दूध प्राप्त हो रहा है। दोनों गायों के बच्चे भी हैं। दूध उत्पादन से होने वाली आय ने पशुपालन को श्री नेहर साय के परिवार के लिए आजीविका के उपयोगी साधन के रूप में मजबूत किया है।
नस्ल सुधार से मिले परिणामों ने उन्हें पशुपालन को आगे बढ़ाने के लिए भी प्रोत्साहित किया है। अब वे अपने पशुधन की संख्या बढ़ाकर इस गतिविधि को और बेहतर तरीके से विकसित करना चाहते हैं।
पशु चिकित्सकों की सलाह से बेहतर हुई देखभाल
श्री नेहर साय बताते हैं कि पशुधन विकास विभाग के चिकित्सक समय-समय पर पशुओं के स्वास्थ्य, आहार, नस्ल सुधार और उचित देखभाल के संबंध में आवश्यक सलाह देते हैं। इस तकनीकी मार्गदर्शन से उन्हें पशुओं की देखभाल और पशुपालन को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने में मदद मिली है।
पशुपालन की पारंपरिक जानकारी के साथ विभागीय तकनीकी सलाह जुड़ने से वे नस्ल सुधार और बेहतर प्रबंधन को अपना सके हैं। इसका लाभ उन्हें बढ़े हुए दूध उत्पादन के रूप में मिल रहा है।
दूध की नियमित आमदनी से परिवार को मिला सहारा
पशुपालन से होने वाली आय अब नेहर साय के परिवार की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में सहायक बन रही है। बेहतर नस्ल की गायों और बढ़े हुए दूध उत्पादन से उन्हें नियमित आमदनी का साधन मिला है।
सेवा संकल्प अभियान के तहत नेहर साय की यह ‘सेवा की कहानी’ बताती है कि पशुधन विकास विभाग की तकनीकी सलाह, कृत्रिम गर्भाधान और नस्ल सुधार जैसी सुविधाओं का लाभ लेकर ग्रामीण पशुपालक अपने पशुओं की उत्पादकता बढ़ाने के साथ अपनी आजीविका को भी मजबूत कर सकते हैं।
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