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मुख्यमंत्री ने साहित्यकारों से बस्तर के संघर्ष और बदलते स्वरूप को साहित्य के माध्यम से दुनिया के सामने लाने की अपील की।
✍️ विशेष संवाददाता
रायपुर | छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित महंत घासीदास संग्रहालय सभागृह में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने युवा साहित्यकार करुणा सागर पण्डा के उपन्यास ‘कोहरा’ का विमोचन किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने साहित्य की शक्ति को रेखांकित करते हुए कहा कि यह न केवल समाज का दर्पण है, बल्कि जनता को सजग करने और सही दिशा दिखाने का भी एक सशक्त माध्यम है। उन्होंने विश्वास जताया कि ‘कोहरा’ जैसे उपन्यास सामाजिक विमर्श को केंद्र में लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने उपन्यास के प्रकाशन पर लेखक करुणा सागर पण्डा को बधाई देते हुए उनके साहस की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण विषयों पर लिखने के लिए विशेष साहस की जरूरत होती है। जब रचनाकार समाज की वास्तविकताओं और समस्याओं को अपनी लेखनी का आधार बनाते हैं, तभी साहित्य सामाजिक चेतना का जरिया बनता है। उन्होंने सिनेमा और साहित्य का उदाहरण देते हुए ‘द केरल स्टोरी’ और ‘द कश्मीर फाइल्स’ जैसी फिल्मों का भी उल्लेख किया और कहा कि कठिन विषयों पर काम करने से अक्सर विरोध का सामना करना पड़ता है, लेकिन रचनाकार को अपनी दृष्टि के साथ सत्य को सामने रखना चाहिए।
प्रदेश की साहित्यिक परंपरा का स्मरण करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती ने देश को अनेक मूर्धन्य रचनाकार दिए हैं। उन्होंने ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित विनोद कुमार शुक्ल, प्रसिद्ध साहित्यकार मुक्तिबोध और पदुमलाल पन्नालाल बख्शी जैसे दिग्गजों के योगदान को याद किया। मुख्यमंत्री ने संतोष व्यक्त किया कि नई पीढ़ी के रचनाकार इस गौरवशाली परंपरा को बखूबी आगे बढ़ा रहे हैं और समकालीन विषयों को मुखरता से समाज के समक्ष रख रहे हैं।
नक्सलवाद की मानवीय त्रासदी पर लेखन का आह्वान
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने साहित्यकारों से अपील की कि वे नक्सलवाद से प्रभावित लोगों के संघर्ष और पीड़ा को अपनी रचनाओं में स्थान दें। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की इच्छाशक्ति और सुरक्षा बलों के साहस से प्रदेश में नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक सफलता मिल रही है। हालांकि, इस हिंसा के कारण कई परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया और बच्चों का भविष्य प्रभावित हुआ। उन्होंने लेखकों से आग्रह किया कि वे बदलते बस्तर की कहानी और वहां की मानवीय त्रासदी को दुनिया के सामने लाएं।
हर घर में हो पुस्तकों का संग्रह
सामाजिक विकास में पुस्तकों के महत्व पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने लोगों से अपने घरों में छोटी लाइब्रेरी बनाने और बच्चों में पढ़ने की रुचि विकसित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि घर की असली शोभा उसकी भव्यता में नहीं, बल्कि वहां की अध्ययन संस्कृति में होती है। पुस्तकें पीढ़ियों के बीच ज्ञान और संस्कार का सेतु बनने का काम करती हैं, इसलिए हर परिवार को पुस्तकों का संग्रह अवश्य रखना चाहिए।
कार्यक्रम में विभिन्न विशेषज्ञों ने रखे विचार
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता सुनील गंगाराम गर्ग ने उपन्यास ‘कोहरा’ को समकालीन समय की एक प्रासंगिक कृति बताया। छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि साहित्य सामाजिक प्रश्नों पर आत्ममंथन का अवसर प्रदान करता है। छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्रा ने उपन्यास की समाधानपरक सोच की सराहना की। वहीं, बीबीजे के स्वतंत्र निदेशक जगन्नाथ पाणिग्रही ने नई पीढ़ी को सामाजिक वास्तविकता से जोड़ने में साहित्य की भूमिका पर जोर दिया।
वरिष्ठ साहित्यकार गिरीश पंकज ने ‘कोहरा’ को साहसिक लेखन का प्रतीक बताते हुए कहा कि इसमें नक्सलवाद जैसी समस्याओं को प्रभावी ढंग से उभारा गया है। इस अवसर पर विधायक पुरंदर मिश्रा, राज्य गौसेवा आयोग के उपाध्यक्ष राजीव लोचन महाराज, जलज कुमार अनुपम सहित अनेक जनप्रतिनिधि, साहित्यकार और बड़ी संख्या में प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे।








