नई दिल्ली।
कांग्रेस कार्यकर्ता व समर्थक नेहरू-गांधी परिवार की पारंपरि सीट अमेंठी और रायबरेली को लेकर चिंतित है। कांग्रेस पार्टी जल्द ही अमेंठी और रायबरेली लोकसभा सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा कर संस्पेस खत्म करने की तैयारी में है। कांग्रेस पार्टी अमेठी और रायबरेली पर सीटों का सस्पेंस अगले 24 घंटे में खत्म हो जाएगा। कांग्रेस ने मंगलवार को एक नई उम्मीदवारों लिस्ट जारी की थी। जिसमें अमेठी और रायबरेली लोकसभा सीटों के लिए उम्मीदवारों के नाम घोषित नहीं करके सस्पेंस बरकरार रखा है।
क्या है अमेठी लोकसभा सीट में कांग्रेस का गुणा भाग
अमेठी संसदीय क्षेत्र 1967 में बनाया गया था और 2019 के लोकसभा चुनाव तक कांग्रेस का रहा गढ़।
1977 में आपातकाल के बाद था, जब जनता पार्टी का एक उम्मीदवार जीता और 1980 तक लोकसभा में उसका प्रतिनिधि बना रहा।
1980 में संजय गांधी ने अमेठी से जीत हासिल की, लेकिन 01 साल बाद एक विमान हादसे में उनकी मौत हो गई।
1981 में संजय गांधी के मौत के बाद उपचुनाव करना पड़ा। जिसमें संजय गांधी के भाई राजीव गांधी ने चुनाव जीता।
1984 में राजीव गांधी की भाभी मेनका गांधी ने स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ जीत हासिल की।
1989 में राजीव गांधी ने महात्मा गांधी के पोते जनता दल के राजमोहन गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ राजीव गांधी ने अमेठी पर जीत हासिल की।
1991 में राजीव गांधी चुनाव जीते लेकिन अमेठी में मतदान के कुछ ही दिन बाद उनकी हत्या कर दी गई। जिसके बाद उपचुनाव कराना पड़ा।
1991 में कांग्रेस के सतीश शर्मा ने निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया और 1998 तक इस सीट पर रहे।
1998 में राजकुमार संजय सिंह ने भाजपा के टिकट पर अमेठी से जीत हासिल की।
1998 के लोकसभा चुनाव में राजकुमार संजय सिंह ने भाजपा के टिकट पर अमेठी से की जीत हासिल।
1999 में सोनियां गांधी ने चुनाव लड़ अपने प्रतिद्वंदी को 3,00,000 वोट के अतंर से हरा कर सोनिया गांधी ने प्रंचण जीत हासिल की।
2004 में राहुल गांधी ने अमेठी लोकसभा चुनाव से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।
2009-2014 में राहुल गांधी ने अमेठी से चुनाव लड़ अपनी जीत की हैट्रिक लगाई।
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